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सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाया की पुनर्गणना की मांग करने वाली दूरसंचार कंपनियों की याचिका खारिज की

LiveLaw News Network
23 July 2021 5:47 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाया की पुनर्गणना की मांग करने वाली दूरसंचार कंपनियों की याचिका खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग ( डीओटी) द्वारा मांगे गए समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया की पुनर्गणना की मांग करने वाली दूरसंचार कंपनियों की याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया।

जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज द्वारा दायर आवेदनों को खारिज करते हुए आदेश सुनाया। पीठ ने 19 जुलाई को आवेदनों पर आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि पहले के एक आदेश के मद्देनज़र पुनर्मूल्यांकन प्रतिबंधित है।

पिछले साल सितंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को 1 अप्रैल, 2021 से शुरू होने वाली 10 वार्षिक किश्तों में एजीआर बकाया का भुगतान करने की अनुमति दी थी। इसी आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार के एजीआर बकाया के आकलन पर रोक लगा दी थी।

बाद में, तीनों दूरसंचार कंपनियों ने यह आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया कि डीओटी द्वारा गणना किए गए बकाया में गणना त्रुटियां हैं। वोडाफोन-आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, डॉ अभिषेक मनु सिंघवी और अरविंद दातार ने तर्क दिया कि पहले के आदेश में गणना त्रुटियों के सुधार पर रोक नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया था कि आदेश केवल पुनर्मूल्यांकन पर रोक लगाता है और गणना संबंधी त्रुटियों के सुधार पर रोक नहीं लगाता है।

यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने अक्टूबर 2019 के फैसले में दूरसंचार कंपनियों और दूरसंचार विभाग के बीच स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग समझौतों में "समायोजित सकल राजस्व" शब्द की व्याख्या से उत्पन्न हुआ है। लाइसेंस शुल्क की गणना एजीआर के आधार पर की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'एजीआर' में कंपनियों के गैर-दूरसंचार संचालन से राजस्व शामिल है जैसे किराया, अचल संपत्तियों की बिक्री पर लाभ, लाभांश और राजस्व आय। इसके परिणामस्वरूप दूरसंचार कंपनियों पर सामूहिक रूप से 92,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारी बनी।

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