कैश विवाद मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज
Shahadat
7 Aug 2026 6:39 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली रिट याचिका खारिज की। यह मामला आग लगने की घटना के दौरान उनके घर पर कथित तौर पर बिना हिसाब-किताब वाले कैश मिलने से जुड़ा था।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने वकील घनश्याम दयालु उपाध्याय की रिट याचिका को 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' (प्रचार पाने के लिए दायर याचिका) करार देते हुए खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी ऐसी ही याचिकाएं खारिज की थीं।
उपाध्याय ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR की मांग करते हुए कहा था कि चूंकि जज इस साल अप्रैल में रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उन्हें अब 'जजेज (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1985' के तहत गिरफ्तारी से छूट नहीं है। यह मामला 14 मार्च, 2025 को आग बुझाने के काम के दौरान जस्टिस वर्मा (जो उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे) के सरकारी आवास के एक आउटहाउस में नोटों का भारी ढेर मिलने से जुड़ा है।
इस घटना के बाद भारी सार्वजनिक विवाद हुआ, जिसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने तीन जजों की एक इन-हाउस जांच समिति बनाई - जस्टिस शील नागू (पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस), जस्टिस जीएस संधावालिया (तत्कालीन हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) और जस्टिस अनु शिवरामन (कर्नाटक हाईकोर्ट की जज)।
जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया और जांच पूरी होने तक उनसे न्यायिक काम वापस ले लिया गया। समिति ने मई में तत्कालीन CJI खन्ना को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें प्रथम दृष्टया जस्टिस वर्मा की गलती पाई गई। CJI ने यह रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी, क्योंकि जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने की CJI की सलाह मानने से इनकार किया था।
सार्वजनिक पारदर्शिता की दिशा में कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आग की घटना से जुड़ी रिपोर्ट और दस्तावेज अपलोड किए, जिनमें जलते हुए कैश की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल थे। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इन-हाउस जांच और उन्हें हटाने की CJI की सिफारिश को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज की थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने एक और याचिका दायर की, जिसमें जांच समिति बनाने के लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती दी गई। उस याचिका को भी कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में खारिज किया था। इसके बाद उन पर लगे आरोपों को लेकर लोकसभा में जांच की कार्यवाही हुई, जिसके बाद उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया। यह इस्तीफ़ा तब दिया गया, जब उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा समिति द्वारा आदेशित जांच चल रही थी। पिछले साल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर कथित तौर पर बिना हिसाब-किताब वाली नकदी मिलने के मामले में जांच के लिए 'जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968' के तहत तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।
यह याचिका पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने थी, लेकिन चूंकि जस्टिस नागू इन-हाउस समिति का हिस्सा थे, इसलिए इस मामले को एक अलग बेंच के सामने रखा गया।
Case Details: GHANSHYAM DAYALU UPADHYAY Vs UNION OF INDIA|W.P.(Crl.) No. 269/2026 Diary No. 38212 / 2026


