पूर्व CJI दीपक मिश्रा को 'बचाने' के लिए केस फाइल करने की फीस के तौर पर मांगे 1 करोड़ रुपये: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की वकील की याचिका
Shahadat
12 March 2026 11:34 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वकील अशोक पांडे की याचिका खारिज की। पांडे ने केंद्र सरकार से फीस और खर्चों के तौर पर 1 करोड़ रुपये की मांग की थी। उनका दावा था कि उन्होंने ये केस पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा को "बचाने" के लिए फाइल किए।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने इस याचिका को "गलत सोच पर आधारित" बताते हुए खारिज किया। बेंच ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को सही ही खारिज किया था।
CJI ने शुरुआत में ही पांडे से पूछा,
"क्या आपका कोई खर्च नहीं हुआ? आप तो खुद ही पेश हुए थे।"
पांडे ने जवाब दिया कि केस लड़ने में उनका करीब 2 लाख रुपये का खर्च आया और इसके लिए उन्हें अपनी बेटी से पैसे लेने पड़े।
जब पांडे ने पूर्व जज के लिए "माननीय" शब्द का इस्तेमाल किया तो CJI कांत ने पूछा,
"किसी जज पर इतने गंभीर आरोप लगाने के बाद अब आप 'माननीय' शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?"
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जब पूर्व CJI महाभियोग का सामना कर रहे थे, तब कोई भी उनके बचाव में आगे नहीं आया।
इस पर CJI ने तंज कसते हुए कहा कि "समाज सेवा" के बदले किसी भी तरह के आर्थिक लाभ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
CJI ने कहा,
"आपने इस संस्था की बहुत बड़ी समाज सेवा की है। यह अमूल्य है। "इसे 1 करोड़ रुपये या 2 करोड़ रुपये के तौर पर कैसे मापा जा सकता है?"
याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी, जिसमें उसकी याचिका खारिज की गई थी। याचिका में उसने केंद्रीय क़ानून और न्याय मंत्रालय को यह निर्देश देने की मांग की थी कि उसे फ़ीस और खर्च के तौर पर 1 करोड़ रुपये दिए जाएं। याचिकाकर्ता का दावा था कि उसने सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसे केस दायर किए, जिनसे तत्कालीन चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) जस्टिस दीपक मिश्रा को "अपमान, बेइज़्ज़ती, मानसिक पीड़ा और पद से हटाए जाने" से बचाया जा सके।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की हाईकोर्ट बेंच ने उसकी याचिका के साथ-साथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 134A के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 'सर्टिफ़िकेट' देने की उसकी मांग को भी खारिज कर दिया।
अपनी रिट याचिका में याचिकाकर्ता (जो खुद ही अपना केस लड़ रहा था), एडवोकेट अशोक पांडे ने अपना आवेदन खारिज किए जाने को भी चुनौती दी, जिसे उसने 28 फ़रवरी, 2024 को भारत के राष्ट्रपति को सौंपा था। इस आवेदन में उसने तत्कालीन CJI मिश्रा को 'बचाने' के लिए दी गई अपनी क़ानूनी सेवाओं के बदले 1 करोड़ रुपये की मांग की थी।
उनकी याचिका जब खारिज हो गई तो एडवोकेट पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए सर्टिफ़िकेट की मांग की। उसने यह तर्क दिया कि उसकी याचिका में राष्ट्रपति और मंत्रालय के अधिकारियों के बीच संबंधों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क़ानूनी सवाल शामिल है।
उसने यह सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रपति द्वारा भेजा गया कोई संदर्भ (Reference) मंत्रालय द्वारा खारिज किया जा सकता है, जबकि राष्ट्रपति का संवैधानिक दर्जा बहुत ऊंचा है। हालांकि, कोर्ट ने उसकी इस मांग को भी खारिज कर दिया।
ग़ौरतलब है कि अप्रैल 2018 में सात अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के राज्यसभा के 71 सदस्यों ने जस्टिस मिश्रा के ख़िलाफ़ महाभियोग (Impeachment) की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने बाद में उस नोटिस को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उसमें कोई ठोस आधार या दम नहीं है।
Case details : ASHOK PANDEY vs. UNION OF INDIA| Diary No. - 106/2026

