'थिंक एंड लर्न' के CIRP में मूल CoC बहाल: NCLT के आदेश के खिलाफ बायजू रवींद्रन की अपील खारिज
Shahadat
5 May 2026 9:41 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल, चेन्नई (NCLAT) के आदेश में दखल देने से इनकार किया। इस आदेश में 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' (वह कंपनी जो एड-टेक कंपनी 'बायजू' चलाती थी) से जुड़ी दिवाला समाधान प्रक्रिया में मूल 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' (CoC) को बहाल किया गया, जिसमें आदित्य बिड़ला और 'ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC' को वित्तीय लेनदार के तौर पर शामिल किया गया।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने बायजू रवींद्रन द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि IRP (दिवाला समाधान पेशेवर) दिवाला कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाएगा, और यह कार्यवाही कानून के अनुसार ही की जाएगी।
जस्टिस पारदीवाला ने कहा,
"इस मामले में हम [दखल] नहीं देंगे। अब यह हद से ज़्यादा हो गया। यह कानूनी लड़ाई बहुत आगे निकल चुकी है। यह आदेश बिल्कुल सही है, हम इसमें कोई दखल नहीं देंगे।"
इस मामले से जुड़े तथ्य ये हैं कि 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट' (BCCI) ने 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू की थी, और पंकज श्रीवास्तव को दिवाला समाधान पेशेवर (IRP) नियुक्त किया गया। उन्होंने 21 अगस्त, 2024 को CoC का गठन किया, जिसमें 'ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC', आदित्य बिड़ला, 'इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड' और 'ICICI बैंक लिमिटेड' शामिल थे।
मुद्दा तब खड़ा हुआ जब IRP ने CoC का पुनर्गठन करने का फैसला किया और दो प्रमुख वित्तीय लेनदारों आदित्य बिड़ला और 'ग्लास ट्रस्ट' को इससे बाहर किया। इन दोनों के पास क्रमशः 0.41% और 99.41% वोटिंग शेयर थे।
31 अगस्त, 2024 को पुनर्गठित CoC में केवल एक ही वित्तीय लेनदार था, जिसका नाम 'इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड' था। उसके पास 100% वोटिंग शेयर थे; जबकि इससे पहले उसके पास केवल 0.18% शेयर थे। इस फैसले को चुनौती दी गई और NCLT बेंगलुरु ने मूल CoC बहाल किया।
इसके खिलाफ 'मेसर्स थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' के निलंबित निदेशक और प्रमोटर बायजू रवींद्रन ने NCLAT में अपील दायर की। हालांकि, 12 अगस्त, 2025 को जारी आदेश के माध्यम से NCLAT ने इस मामले में दखल देने से इनकार किया। इसमें कहा गया कि रेज़ोल्यूशन प्रोफ़ेशनल के पास कोई न्यायिक शक्तियां नहीं होतीं, और एक बार CoC का गठन हो जाने के बाद IRP उसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता।
Case Details: BYJU RAVEENDRAN v ADITYA BIRLA FINANCE LIMITED AND ORS|Diary No. 52266-2025

