गैर-कानूनी AI-जनरेटेड कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए सिस्टम बनाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विचार करने को कहा
Shahadat
11 Aug 2026 8:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया। इस याचिका में भारत में ऐसे कंटेंट की तुरंत रिपोर्टिंग और URL-स्पेसिफिक एक्सेस बंद करने के लिए सिस्टम बनाने की मांग की गई, जिसमें शारीरिक हिंसा की धमकी, डॉक्सिंग, निजी जानकारी का बिना अनुमति खुलासा और बिना सहमति के AI-जनरेटेड कंटेंट शामिल हैं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर PIL (जनहित याचिका) पर यह आदेश पारित किया। उन्होंने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। याचिकाकर्ता ने कई मुद्दे उठाए, जिनमें बिना अनुमति ऑनलाइन कंटेंट, डीपफेक और ऑनलाइन धमकियों से होने वाले नुकसान शामिल हैं।
बेंच ने प्रतिवादियों (MeitY, गृह मंत्रालय और कानून और न्याय मंत्रालय) को याचिकाकर्ता की याचिका पर गौर करने और ज़रूरत के अनुसार सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया।
संक्षेप में मामला
PIL में प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ता की 22 जून, 2026 की याचिका पर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर, अधिमानतः 3 महीने के भीतर विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई।
इस याचिका में संविधान के अनुरूप एक ऐसे सिस्टम की मांग की गई, जो तुरंत रिपोर्टिंग, संरक्षण, कानूनी/न्यायिक समीक्षा और भारत के भीतर URL-स्पेसिफिक एक्सेस बंद करने की सुविधा दे, खासकर उन मामलों में जिनमें शामिल हों:
- शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा या मौत की विशिष्ट धमकियां।
- डॉक्सिंग जिससे नुकसान की उचित आशंका हो।
- निजी जानकारी, तस्वीरों, स्कूल की जानकारी, लोकेशन डेटा या नाबालिग बच्चों की पहचान से जुड़ी जानकारी का बिना अनुमति खुलासा।
- बिना सहमति के अंतरंग, मॉर्फ्ड, सिंथेटिक या AI-जनरेटेड कंटेंट।
- बिना सहमति के डीपफेक या डिजिटल रूप से हेरफेर करके किसी और का रूप धारण करना, जिससे सुरक्षा, सम्मान, आजीविका या प्रतिष्ठा को तत्काल गंभीर नुकसान हो।
याचिकाकर्ता ने आगे यह भी अनुरोध किया कि एक अंतरिम उपाय के रूप में (उनकी याचिका पर विचार होने तक), पीड़ित व्यक्तियों को URL-स्पेसिफिक राहत के लिए अधिकार क्षेत्र वाली अदालत, हाईकोर्ट या किसी अन्य निर्दिष्ट ड्यूटी कोर्ट में जाने की अनुमति दी जाए।
उन्होंने शिकायत किए गए किसी भी कंटेंट को सुरक्षित रखने के संबंध में भी राहत की मांग की।
याचिका में आगे यह स्पष्ट करने की भी मांग की गई कि प्रस्तावित निर्देश राजनीतिक भाषणों, पत्रकारिता के काम, व्यंग्य, निष्पक्ष आलोचना आदि पर पहले से रोक लगाने या आपातकालीन स्थिति में उन्हें हटाने के लिए अधिकृत नहीं करेंगे।
Case: NARENDRA KUMAR GOSWAMI Versus UNION OF INDIA AND ORS. ,W.P.(C) No. 823/2026
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