'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम' के पालन के मामले में केंद्र सरकार की स्थिति का आकलन करे: सुप्रीम कोर्ट ने NLU दिल्ली को दिया निर्देश
Shahadat
7 May 2026 5:14 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वह 'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' के प्रावधानों के पालन के मामले में भारत सरकार की स्थिति का आकलन करे।
उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने इससे पहले 8 NLU को निर्देश दिया था कि वे पूरे देश में उन देखभाल संस्थानों का आकलन करें, जहां संज्ञानात्मक दिव्यांगता वाले लोग रहते हैं। साथ ही वे इस अधिनियम के पालन की स्थिति का भी जायज़ा लें। इस परियोजना को 'प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट' (Project Ability Empowerment) नाम दिया गया था।
हाल ही में, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरे देश में 2016 के अधिनियम के पालन का आकलन उन 8 NLU द्वारा ही किया जाए। साथ ही NLU दिल्ली अपने आकलन के दायरे में भारत सरकार को भी शामिल करे।
आगे कहा गया,
"आगे यह भी निर्देश दिया जाता है कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली इस बात का आकलन करने का कार्य करे कि भारत सरकार ने 'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' के प्रावधानों का किस हद तक पालन किया है। प्रभावी समन्वय और सार्थक जुड़ाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव, संयुक्त सचिव से कम रैंक के किसी अधिकारी को नामित करेंगे। यह अधिकारी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली द्वारा बुलाई जाने वाली उन बैठकों में शामिल होगा, जो इस आदेश में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के संबंध में आयोजित की जाएंगी।"
कोर्ट ने कहा,
"इस तरह की निगरानी केवल औपचारिक नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें वैधानिक आदेशों के पालन का ठोस मूल्यांकन शामिल होना चाहिए, जिसमें आवश्यक संस्थागत तंत्रों का निर्माण, अधिकारों का प्रवर्तन और सुलभता (Accessibility) से जुड़े उपाय शामिल हैं।"
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए टिप्पणी की कि 'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act) के लागू हुए 8 साल बीत जाने के बावजूद, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इसके पालन का मामला अभी भी "पकड़ से बाहर" (elusive) बना हुआ है।
इस मामले में कोर्ट ने पहले भी उन दिव्यांग व्यक्तियों को सामान्य श्रेणी की सीटें न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की थी, जिन्होंने अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित कट-ऑफ अंकों से भी अधिक अंक प्राप्त किए। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, इस बात का संज्ञान लेते हुए कि केंद्र सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों (PwBDs) की नियुक्ति और पदोन्नति उनकी अपनी योग्यता के आधार पर सुनिश्चित करने के लिए पहले ही कार्यकारी निर्देश जारी कर दिए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इस नीति का अक्षरशः और पूरी भावना के साथ पालन किया जाए।
Case Title: JUSTICE SUNANDA BHANDARE FOUNDATION Versus U.O.I. AND ORS., W.P.(C) No. 116/1998

