सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को HIV/AIDS से पीड़ित लोगों के लिए ART दवाओं के बारे में चिंताओं को दूर करने का निर्देश दिया

  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को HIV/AIDS से पीड़ित लोगों के लिए ART दवाओं के बारे में चिंताओं को दूर करने का निर्देश दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को HIV/AIDS से पीड़ित लोगों (PLHIV) के लिए एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दवाओं के आवधिक स्टॉकआउट, निविदा और खरीद में पारदर्शिता और दवा की गुणवत्ता और प्रमाणन प्रक्रियाओं से संबंधित चिंताओं का जवाब देने का निर्देश दिया।

    जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने राज्यों को आदेश दिया कि वे खरीद प्रणाली में प्रणालीगत विफलताओं के संबंध में HIV/AIDS से पीड़ित लोगों के नेटवर्क द्वारा दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ताओं द्वारा विस्तृत छह मुद्दों पर हलफनामा दायर करें।

    न्यायालय ने कहा,

    "हम सभी प्रतिवादियों/राज्यों को याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर 5 सितंबर, 2024 के हलफनामे और विशेष रूप से उक्त हलफनामे के साथ संलग्न 23 अगस्त, 2024 के पत्र में निर्दिष्ट छह बिंदुओं के जवाब में अपने हलफनामे दायर करने का निर्देश देते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट ने कहा कि विशेष रूप से सभी राज्यों को 23 अगस्त, 2024 के पत्र के खंड 'सी' से बहुत स्पष्ट रूप से निपटना होगा। अंत में हम सभी प्रतिवादियों/राज्यों को उपरोक्त निर्देशों के अनुसार अपने हलफनामे दाखिल करने के लिए एक महीने का समय देते हैं।”

    न्यायालय ने जनवरी में याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं पर केंद्र से जवाब भी मांगा। मामले की अगली सुनवाई 4 अप्रैल, 2025 को सूचीबद्ध की गई।

    याचिका में खरीद प्रणाली में प्रणालीगत विफलताओं का आरोप लगाया गया, जिसके कारण ART दवाओं की बार-बार कमी हुई, जिससे PLHIV का उपचार बाधित हुआ। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे PLHIV में बीमारी और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है, जो उनके स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर, 2022 को मामले में नोटिस जारी किया। 10 जुलाई, 2024 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उस समय ART दवाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्होंने खरीद प्रक्रिया और दवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने की अनुमति दी, जिससे उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके।

    हलफनामे के अनुसार, याचिकाकर्ताओं और NACO अधिकारियों के बीच 1 अगस्त, 2024 को एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद याचिकाकर्ताओं ने 23 अगस्त, 2024 को NACO को एक पत्र भेजा, जिसमें छह मुद्दों को सूचीबद्ध किया गया, जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता थी:

    1. आवधिक स्टॉकआउट: याचिकाकर्ताओं ने 2004, 2009 और 2022 में HIV ARV के आवर्ती स्टॉकआउट के साथ-साथ HIV किट और टीबी दवाओं की हाल की कमी पर प्रकाश डाला। उन्होंने शीघ्र खरीद प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर बल दिया तथा NACO से आग्रह किया कि वह काली सूची में डाली गई कंपनियों को अनुबंध देने से बचें।

    2. निविदा और खरीद पारदर्शिता: याचिकाकर्ताओं ने खरीद प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की, जिसमें निविदा विवरण को NACO वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना शामिल है।

    3. दवा की गुणवत्ता और प्रमाणन प्रक्रिया: राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा संचालित प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं के बारे में चिंताएं व्यक्त की गईं, विशेष रूप से TLD टैबलेट की स्थिरता और स्वाद के बारे में। याचिकाकर्ताओं ने उच्च दवा गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए कड़े पूर्व-योग्यता मानदंड की मांग की।

    4. समन्वय समिति: याचिकाकर्ताओं ने स्टॉकआउट की वास्तविक समय निगरानी, ​​पारदर्शी संचार और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पहले से कार्यरत समन्वय समिति को फिर से स्थापित करने का सुझाव दिया।

    5. स्वतंत्र निगरानी: उन्होंने स्टॉकआउट की जांच के लिए रिटायर जज, स्वास्थ्य अधिकारियों, सामुदायिक प्रतिनिधियों और गुणवत्ता विशेषज्ञों वाली स्वतंत्र समिति स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    6. सहमति आदेश: याचिकाकर्ताओं ने प्रस्तावित परिवर्तनों को औपचारिक रूप देने और समन्वय समिति को फिर से स्थापित करने के लिए सहमति आदेश जारी करने का सुझाव दिया।

    यह मामला शुरू में अगस्त 2022 में दायर किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि 2021-2022 के लिए निविदा प्रक्रिया में देरी के कारण ART दवाओं की भारी कमी थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अगस्त 2021 के लिए निर्धारित निविदा दिसंबर 2021 में जारी की गई, लेकिन विफल रही, जिसके कारण मार्च 2022 में एक नई निविदा जारी की गई, जिसमें भी देरी हुई।

    उन्होंने तर्क दिया कि इस स्थिति में PLHIV के लिए निर्बाध उपचार सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन खरीद की आवश्यकता थी।

    जवाब में भारत संघ ने एक संक्षिप्त नोट प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि एआरवी दवाओं का कोई राष्ट्रव्यापी स्टॉकआउट नहीं था। यह कहा गया कि COVID-19 महामारी के दौरान भी पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी गई। सरकार ने बताया कि 2022-2023 के लिए खरीद चक्र में दो साल की आपूर्ति शामिल है, जो 2025 तक चलने की उम्मीद है।

    सुनवाई के दौरान, सीनियर वकील आनंद ग्रोवर ने बताया कि दवा के रिलीज़ होने के बाद शुरुआती चार साल केंद्रीय रूप से विनियमित होते हैं, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित होती है, लेकिन जब अनुमोदन और विनियमन राज्यों के पास चला जाता है तो समस्याएं पैदा होती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों पर कोई राय व्यक्त नहीं की, लेकिन याचिकाकर्ताओं को NACO और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ चर्चा करने की अनुमति दी। याचिकाकर्ताओं को इस मुद्दे को हल करने के लिए ठोस सुझाव पेश करने की भी अनुमति दी गई।

    केस टाइटल- नेटवर्क ऑफ़ पीपल लिविंग विद HIV/AIDS और अन्य बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य।

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