ज्यूडिशियल अधिकारियों के रवैये से नाराज़गी सुप्रीम कोर्ट, सर्विस मामलों के लिए हाईकोर्ट कमेटियों के पास जाने को कहा

Shahadat

18 Aug 2026 9:11 PM IST

  • ज्यूडिशियल अधिकारियों के रवैये से नाराज़गी सुप्रीम कोर्ट, सर्विस मामलों के लिए हाईकोर्ट कमेटियों के पास जाने को कहा

    ऑल इंडिया जजेज़ एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ज्यूडिशियल अधिकारियों द्वारा अपनी सर्विस से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सीधे कोर्ट के पास आने की प्रथा पर नाराज़गी जताई।

    कोर्ट का मानना ​​था कि ऐसा शायद इसलिए हो रहा है, क्योंकि हाई कोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटियां समय पर इन मुद्दों का समाधान नहीं कर पा रही हैं।

    इसलिए ज्यूडिशियल अधिकारियों को सीधे सुप्रीम कोर्ट आने से रोकने के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटियों को संवेदनशील बनाने का आग्रह किया। इससे पहले, कोर्ट ने हाई कोर्ट को ज्यूडिशियल अधिकारियों की शिकायतों से निपटने के लिए "डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी की सर्विस शर्तों के लिए कमेटी" बनाने का निर्देश दिया।

    पिछले हफ़्ते जारी हालिया आदेश में कोर्ट ने कहा:

    “इस समय, कोर्ट को यह कहना पड़ रहा है कि कई ज्यूडिशियल अधिकारी, चाहे व्यक्तिगत तौर पर हों या समूह के तौर पर, अपनी शिकायतों के समाधान के लिए सबसे पहले इसी कोर्ट का रुख कर रहे हैं। हमें लगता है कि ज़्यादातर मामलों में ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि संबंधित हाईकोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटियों (या ऐसी ही किसी दूसरी कमेटी) ने समय पर कोई पहल या समाधान की कार्रवाई नहीं की। इसलिए हम सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध करते हैं कि वे ज्यूडिशियल अधिकारियों की सर्विस शर्तों से जुड़े लंबित मुद्दों को हल करने और उचित निर्णय लेने के लिए अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव/अन्य कमेटियों को संवेदनशील बनाएं।”

    कोर्ट ने यह टिप्पणी अलग-अलग राज्यों में कार्यरत और रिटायर्ड ज्यूडिशियल अधिकारियों की सर्विस शर्तों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई के दौरान की।

    कोर्ट ने देखा कि ज्यूडिशियल अधिकारी, या तो व्यक्तिगत रूप से या प्रतिनिधि संस्थाओं के माध्यम से अपनी शिकायतों के समाधान के लिए सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे थे। इसलिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया गया कि वे ज्यूडिशियल अधिकारियों की सर्विस शर्तों से जुड़े लंबित मुद्दों पर विचार करें और उचित निर्णय लें।

    कोर्ट ने पीड़ित/प्रभावित ज्यूडिशियल अधिकारियों को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की छूट भी दी। हाई कोर्ट मामले पर विचार करने के बाद, अगर उसे लगता है कि कार्यरत या रिटायर्ड ज्यूडिशियल अधिकारी किसी खास वेतन, लाभ या सर्विस से जुड़ी अन्य राहत के हकदार हैं तो वह संबंधित राज्य सरकार को सिफारिश करेगा।

    कोर्ट ने कहा,

    "यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि अगर हाईकोर्ट यह तय करता है कि न्यायिक अधिकारी (चाहे वे अभी काम कर रहे हों या रिटायर हो चुके हों) किसी खास वेतन या अन्य लाभों के हकदार हैं तो ऐसी सिफारिश तुरंत राज्य सरकार को भेजी जानी चाहिए। अगर राज्य सरकारें ऐसी सिफारिशों को लागू करने में कोई कार्रवाई नहीं करती हैं, तभी न्यायिक दखल की ज़रूरत पड़ सकती है। इसके लिए प्रभावित या पीड़ित न्यायिक अधिकारी संबंधित हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।"

    साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि जब तक 'एमिकस' (न्यायालय के सहयोगी) लंबित मुद्दों की पहचान और उनका वर्गीकरण पूरा नहीं कर लेते, तब तक इन मामलों में किसी भी IA/MA (अंतरिम/विविध आवेदन) पर विचार न किया जाए। हालांकि, न्यायिक अधिकारी या प्रतिनिधि संस्थाएं उन मुद्दों के संबंध में अपनी बात रख सकती हैं, जिन पर कोर्ट पहले से विचार कर रहा है।

    कोर्ट ने कहा,

    "अगर कोई न्यायिक अधिकारी या प्रतिनिधि संस्था किसी ऐसे मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहती है, जिस पर कोर्ट पहले से ही किसी मौजूदा आवेदन के ज़रिए विचार कर रहा है, तो उन्हें भी उस मुद्दे पर अपनी बात रखने की अनुमति दी जाएगी।"

    कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि जहां किसी पहले के आदेश में किसी न्यायिक अधिकारी या संगठन को किसी खास शिकायत को उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की ज़रूरत हो, वहां ऐसा एक स्वतंत्र याचिका के ज़रिए किया जा सकता है।

    हालांकि, रजिस्ट्री ऐसी याचिका पर तब तक विचार नहीं करेगी, जब तक कि उसकी एक अग्रिम प्रति 'एमिकस क्यूरी' को न दी जाए। सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ भटनागर और के. परमेश्वर को 'एमिक्स क्यूरी' नियुक्त किया गया।

    Cause Title: ALL INDIA JUDGES ASSOCIATION VERSUS UNION OF INDIA & ORS.

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