COVID-19 टीकाकरण से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के लिए 'नो-फॉल्ट मुआवजा नीति' बनाए केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

10 March 2026 2:07 PM IST

  • COVID-19 टीकाकरण से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा नीति बनाए केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह कोविड-19 टीकाकरण के बाद गंभीर प्रतिकूल प्रभाव (Adverse Events) झेलने वाले लोगों के लिए “नो-फॉल्ट मुआवजा नीति” तैयार करे।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए पहले से मौजूद AEFI (Adverse Events Following Immunization) प्रणाली पहले की तरह ही जारी रहेगी।

    अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे प्रतिकूल प्रभावों से संबंधित डेटा समय-समय पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले 2021 के डॉ. जैकब पुलियेल मामले में भी कहा था।

    हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि टीके से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की जांच के लिए किसी नए न्यायालय-नियुक्त विशेषज्ञ निकाय की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही निगरानी और जांच की व्यवस्था मौजूद है।

    साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नो-फॉल्ट मुआवजा नीति बनाने का अर्थ यह नहीं माना जाएगा कि केंद्र सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण ने किसी गलती या जिम्मेदारी को स्वीकार किया है।

    अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी नीति बनने से प्रभावित लोगों के लिए कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेने का अधिकार खत्म नहीं होगा।

    यह फैसला रचना गांगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उनकी बेटियों की मृत्यु कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के कारण हुई और उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार से मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की थी।

    इसके अलावा, एक अन्य याचिका केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई थी, जिसमें केरल हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें टीकाकरण से कथित मौत के मामलों में मुआवजा नीति बनाने का निर्देश दिया गया था। यह मामला सायिदा केए द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिनका आरोप था कि उनके पति की मौत टीकाकरण के कारण हुई।

    केंद्र सरकार ने 2022 में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि टीकाकरण स्वैच्छिक (voluntary) था और लोगों ने जोखिमों की जानकारी के आधार पर स्वयं निर्णय लेकर टीका लगवाया था, इसलिए सरकार मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है।

    मामले की सुनवाई के दौरान नवंबर 2023 में विस्तृत बहस के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह यह तय करेगी कि क्या किसी विशेषज्ञ समिति की आवश्यकता है और क्या निर्देश दिए जाने चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्णय देते हुए केंद्र सरकार को नो-फॉल्ट मुआवजा नीति तैयार करने का निर्देश दिया है।

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