जज पर टिप्पणी मामले में यूट्यूबर की माफी स्वीकार, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही समाप्त की

Praveen Mishra

9 March 2026 4:22 PM IST

  • जज पर टिप्पणी मामले में यूट्यूबर की माफी स्वीकार, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही समाप्त की

    सुप्रीम कोर्ट ने आज (9 मार्च) चंडीगढ़ स्थित यूट्यूबर और वरप्रद मीडिया के एडिटर-इन-चीफ अजय शुक्ला के खिलाफ शुरू की गई स्वप्रेरित (सुओ मोटू) अवमानना कार्यवाही को बंद कर दिया। यह कार्यवाही उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के खिलाफ किए गए कथित “अपमानजनक, अवमाननापूर्ण और मानहानिकारक” टिप्पणियों को लेकर शुरू की गई थी।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह मामला उस समय निस्तारित कर दिया, जब अजय शुक्ला ने अपने वकील एडवोकेट ईशा बख्शी के माध्यम से बिना शर्त माफी पेश की। हालांकि, अदालत ने उन्हें भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी भी दी।

    अदालत ने कहा, “प्रतिवादी को भविष्य में सावधान रहना होगा। इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति या कोई शिकायत होने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

    दरअसल, अजय शुक्ला ने अपने यूट्यूब चैनल 'द प्रिंसिपल' (जो वरप्रद मीडिया के स्वामित्व में है) पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के खिलाफ आपत्तिजनक और सनसनीखेज आरोप लगाए गए थे।

    इस मामले पर 30 मई 2025 को तत्कालीन चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने सुओ मोटू अवमानना कार्यवाही शुरू की थी। खंडपीठ ने कहा था कि इस प्रकार के आरोप न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचा सकते हैं और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं।

    अदालत ने यह भी कहा था कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार उचित प्रतिबंधों के अधीन है। किसी व्यक्ति को यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह इस न्यायालय या किसी अन्य अदालत के न्यायाधीश के खिलाफ मानहानिकारक और अवमाननापूर्ण आरोप लगाकर न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने अजय शुक्ला, यूट्यूब, भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को नोटिस जारी किया था। साथ ही एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए यूट्यूब को संबंधित वीडियो क्लिप हटाने का निर्देश भी दिया गया था।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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