जज को कॉल करने के आरोपी BJP MLA पर अवमानना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर को हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति

  • जज को कॉल करने के आरोपी BJP MLA पर अवमानना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर को हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक व्हिसलब्लोअर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की अनुमति दे दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अशुतोष दीक्षित को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि वह हाईकोर्ट में जाकर कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति मांग सकते हैं।

    यह मामला उस समय सामने आया जब दीक्षित ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर कथित अवैध खनन का आरोप लगाया था, जो कथित रूप से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से जुड़ा था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने यह कहते हुए खुद को मामले से अलग कर लिया कि संबंधित विधायक ने उनसे इस मामले में बात करने का प्रयास किया था। इसके बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 3 अप्रैल को स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की।

    हालांकि, दीक्षित इस बात से असंतुष्ट थे कि उनकी याचिका को अन्य राहतों पर विचार किए बिना निपटा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने दलील दी कि एक मौजूदा विधायक द्वारा जज से संपर्क करने का प्रयास गंभीर मामला है और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट पहले ही इस मामले का संज्ञान ले चुका है और उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि अदालत को यह निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वह किस प्रकार कार्रवाई करे और राजनीतिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी।

    अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए याचिकाकर्ता को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित अवमानना कार्यवाही में सहायता के लिए आवेदन करने की छूट दे दी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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