सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाईकोर्ट सीजे और जजों की पेंशन पर 2025 के फैसले को स्पष्ट किया, अक्टूबर 2016 से होगा लागू

Shahadat

23 May 2026 10:23 AM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाईकोर्ट सीजे और जजों की पेंशन पर 2025 के फैसले को स्पष्ट किया, अक्टूबर 2016 से होगा लागू

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिटायर्ड चीफ जस्टिस और हाईकोर्ट के जजों के लिए क्रमशः 15 लाख रुपये और 13.5 लाख रुपये की संशोधित पूरी पेंशन के संबंध में उसके 2025 के निर्देश 9 अक्टूबर, 2016 से लागू होंगे।

    कोर्ट ने कहा,

    "पैरा 76 (i), (ii) को इस हद तक स्पष्ट किया जाता है कि [उसमें] उल्लिखित संशोधित पूरी पेंशन 09.10.2016 से स्वीकार्य होगी। बकाया राशि की गणना तदनुसार की जाएगी। यदि कोई जज इस तारीख से पहले रिटायर्ड हो गया है तो ऐसी बकाया राशि की गणना रिटायर्ड चीफ जस्टिस/जज (जैसा भी मामला हो) के लिए स्वीकार्य पूर्व-संशोधित अधिकतम पेंशन के आधार पर की जाएगी।"

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने भारत संघ द्वारा दायर एक विविध आवेदन पर यह स्पष्टीकरण जारी किया, जिसका प्रतिनिधित्व अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने किया था।

    संक्षेप में मामला

    मई, 2025 में पूर्व CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली 3-जजों की पीठ ने फैसला सुनाया था कि सभी रिटायर्ड जज "एक रैंक एक पेंशन" के सिद्धांत का पालन करते हुए अपनी रिटायरमेंट की तारीख और सेवा में प्रवेश के स्रोत की परवाह किए बिना, पूरी और समान पेंशन के हकदार हैं। यह देखा गया कि हाईकोर्ट के जजों की पेंशन में इस आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता कि उन्होंने सेवा में कब प्रवेश किया और क्या वे न्यायिक सेवा से नियुक्त हुए हैं या बार (वकीलों के समूह) से।

    3-जजों की पीठ द्वारा जारी किए गए दो मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:

    1. भारत संघ हाई कोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश को प्रति वर्ष 15 लाख रुपये की पूरी पेंशन का भुगतान करेगा।

    2. भारत संघ हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस के अलावा, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को प्रति वर्ष 13.50 लाख रुपये की पूरी पेंशन का भुगतान करेगा। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज में वह व्यक्ति भी शामिल होगा, जो अतिरिक्त जज के रूप में रिटायर्ड हुआ हो।

    उक्त आदेश ने इन दो निर्देशों को स्पष्ट किया।

    Case Title: IN RE REFIXATION OF PENSION CONSIDERING SERVICE PERIOD IN DISTRICT JUDICIARY AND HIGH COURT Versus,

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