RERA पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी: डिफॉल्टर बिल्डरों को ही लाभ, राज्यों को गठन पर पुनर्विचार का समय

  • RERA पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी: डिफॉल्टर बिल्डरों को ही लाभ, राज्यों को गठन पर पुनर्विचार का समय

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने गुरुवार को कई राज्यों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के कामकाज पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य इस प्राधिकरण के गठन के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।

    सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, “यह उचित समय है कि सभी राज्य इस प्राधिकरण के गठन पर दोबारा विचार करें।” उन्होंने आगे कहा कि RERA डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधाएं देने के अलावा कोई ठोस कार्य नहीं कर रहा है। “डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा यह कुछ नहीं कर रहा। बेहतर होगा कि इस संस्था को ही समाप्त कर दिया जाए,” उन्होंने जोड़ा।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने राज्य सरकार के शिमला से धर्मशाला RERA कार्यालय स्थानांतरित करने के निर्णय पर रोक लगा दी थी।

    राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट माधवी दिवान ने बताया कि संबंधित जनहित याचिका (PIL) एक प्रॉपर्टी डीलर द्वारा दायर की गई थी।

    वहीं, प्रतिवादी पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की विश्वसनीयता हाईकोर्ट के समक्ष उजागर की गई थी और हाईकोर्ट चाहे तो उसे याचिकाकर्ता के रूप में मुक्त कर किसी एमिकस क्यूरी (amicus curiae) की नियुक्ति कर सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि RERA में चेयरमैन की नियुक्ति में देरी हुई है और कार्यालय को धर्मशाला स्थानांतरित करने से शिमला में स्थित अधिकांश हितधारकों को असुविधा होगी। उनके अनुसार, लगभग 90% संपत्तियां और शिकायतें शिमला से संबंधित हैं, जबकि धर्मशाला में केवल 20% संपत्तियां RERA के अधीन हैं।

    अंततः सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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