'ट्रस्ट संपत्ति सार्वजनिक चिंता का विषय'—CSI चर्च जमीन बिक्री मामले में आपराधिक केस बहाल: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

1 April 2026 5:19 PM IST

  • ट्रस्ट संपत्ति सार्वजनिक चिंता का विषय—CSI चर्च जमीन बिक्री मामले में आपराधिक केस बहाल: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने चर्च ऑफ साउथ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन (CSITA) की भूमि की कथित धोखाधड़ी से बिक्री से जुड़े मामले में आपराधिक कार्यवाही बहाल कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट की संपत्ति को निजी मामला नहीं माना जा सकता और उसके हस्तांतरण में किसी भी अनियमितता को सार्वजनिक चिंता का विषय माना जाएगा।

    जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया था।

    मामला आंध्र प्रदेश के अनंतपुरम में स्थित चर्च ट्रस्ट की 7.75 एकड़ भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। आरोप है कि 22 सितंबर 2007 की बिक्री डीड के तहत केवल 1 एकड़ भूमि बेचने की अनुमति थी, लेकिन इसके विपरीत 7.75 एकड़ भूमि का सौदा कर दिया गया। रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से यह prima facie सामने आया कि पूरे भूखंड की बिक्री के लिए कोई वैध अनुमति नहीं दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भले ही ट्रस्ट की संपत्ति का प्रबंधन किसी संस्था द्वारा किया जाता हो, लेकिन वह व्यापक समुदाय के हित के लिए होती है, इसलिए उसके हस्तांतरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता सार्वजनिक महत्व का विषय है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक कानून के तहत कोई भी व्यक्ति, जिसे अपराध की जानकारी हो, शिकायत दर्ज करा सकता है और केवल देरी के आधार पर मामले को खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अपराध बाद में सामने आया हो।

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शिकायतकर्ता के पास मामला दायर करने का अधिकार (locus standi) नहीं था और FIR दर्ज करने में देरी हुई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन आधारों को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि इस स्तर पर अदालत को साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन या “मिनी ट्रायल” नहीं करना चाहिए।

    अदालत ने कहा कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय (triable) हैं, तो मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को बहाल करते हुए निर्देश दिया कि ट्रायल वहीं से आगे बढ़े, जहां से इसे रोका गया था।

    इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ट्रस्ट संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है और ऐसे मामलों को केवल तकनीकी आधारों पर खारिज नहीं किया जा सकता।

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