बाल मजदूरी पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया

  • बाल मजदूरी पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने बाल मजदूरी रोकने से जुड़े कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को एक विशेष सेल (Special Cell) गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करे।

    जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए ये निर्देश दिए।

    क्या था मामला?

    याचिका में विशेष रूप से अधिनियम की धारा 3 को चुनौती दी गई थी। इस प्रावधान के मूल स्वरूप में बच्चों के रोजगार पर केवल कुछ निर्दिष्ट खतरनाक व्यवसायों में प्रतिबंध लगाया गया था।

    हालांकि, वर्ष 2016 में कानून में संशोधन किया गया, जिसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सभी व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नियोजित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। इसमें सीमित अपवाद भी रखे गए हैं।

    संशोधित कानून के तहत बच्चे स्कूल के बाद या छुट्टियों के दौरान गैर-खतरनाक पारिवारिक उद्यमों में सहायता कर सकते हैं, बशर्ते कानून में निर्धारित शर्तों का पालन किया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2016 के संशोधन के बाद याचिका में उठाए गए मुद्दे अब विचार के लिए शेष नहीं रह गए हैं। हालांकि, कानून में किए गए संशोधनों का पूरी तरह और सख्ती से पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

    कोर्ट ने कहा कि बच्चों और किशोरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संशोधित कानून का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।

    विशेष सेल गठित करने का निर्देश

    इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया, जो अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करेगा।

    कोर्ट ने केंद्र सरकार को संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी करने को भी कहा, ताकि बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और वर्ष 2016 के संशोधनों का पूर्ण एवं सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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