इंडियाबुल्स वित्तीय अनियमितता मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI और दिल्ली पुलिस EOW को लगाई फटकार, कहा- जनवरी से जुलाई तक किया क्या?

  • इंडियाबुल्स वित्तीय अनियमितता मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI और दिल्ली पुलिस EOW को लगाई फटकार, कहा- जनवरी से जुलाई तक किया क्या?

    सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में प्रगति नहीं होने पर CBI और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जनवरी में हलफनामा दाखिल होने के बाद से अब तक जांच एजेंसियों ने अदालत को कोई ताज़ा स्थिति रिपोर्ट नहीं दी।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कंपनी के प्रमोटरों पर फंड की हेराफेरी, राउंड-ट्रिपिंग, धन के कथित दुरुपयोग और कंपनी अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि CBI के जनवरी के हलफनामे में ED और SEBI द्वारा फंड की हेराफेरी के मामलों का उल्लेख किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख आरोपी समीर गहलोत लंदन चले गए हैं और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाना चाहिए।

    इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, "अब जुलाई का अंत आ गया है। जनवरी से जुलाई तक CBI ने किया क्या?" उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियों को लगता है कि कोई अपराध नहीं हुआ, तो उन्हें साहस के साथ यह भी कहना चाहिए।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि जांच जारी है और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) भी मामले की जांच कर रहा है। हालांकि कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और कहा कि जांच एजेंसियों की भूमिका "बेहद संदिग्ध" प्रतीत होती है।

    अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI और EOW द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करना और जांच की प्रगति से अदालत को अवगत न कराना गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने कहा कि यदि ASG ने आश्वासन न दिया होता, तो वह दोनों एजेंसियों के प्रमुखों को तलब कर सकता था।

    अदालत ने CBI और EOW को दो सप्ताह के भीतर ताज़ा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट दाखिल होने के बाद होगी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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