वायु प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की ढीली कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई, कारणों और दीर्घकालिक समाधानों पर रिपोर्ट तलब

Praveen Mishra

6 Jan 2026 7:21 PM IST

  • वायु प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की ढीली कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई, कारणों और दीर्घकालिक समाधानों पर रिपोर्ट तलब

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में लगातार बने हुए वायु प्रदूषण संकट को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के रवैए को “गैर-गंभीर” करार देते हुए कड़ी आलोचना की और आयोग को निर्देश दिया कि वह तुरंत डोमेन विशेषज्ञों की एक समन्वित बैठक बुलाए तथा व्यापक रिपोर्ट अदालत के समक्ष और सार्वजनिक डोमेन में प्रस्तुत करे।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाएँ प्रदूषण के स्रोतों और उनके योगदान के प्रतिशत को लेकर आपस में भिन्न-भिन्न निष्कर्ष प्रस्तुत कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, पीठ ने कहा कि NCR में परिवहन क्षेत्र के प्रदूषण योगदान का अनुमान 12 प्रतिशत से 41 प्रतिशत के बीच बताया गया है, जो विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार अलग-अलग है। अदालत ने यह भी कहा कि अनेक कदम उठाए जाने के बावजूद वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है।

    CAQM की रिपोर्ट पर कोर्ट नाराज़

    अदालत ने 17 दिसंबर 2025 के अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि CAQM को दीर्घकालिक उपायों की पुनर्समीक्षा करने को कहा गया था, लेकिन उसने केवल एक स्थिति-पत्र (स्टेटस नोट) दायर किया, जो अदालत द्वारा उठाए गए अधिकांश प्रश्नों पर मौन है और गंभीरता प्रदर्शित नहीं करता। अदालत ने कहा कि आयोग न तो प्रदूषण के सटीक कारणों की पहचान करने में जल्दबाज़ी दिखा रहा है और न ही दीर्घकालिक समाधान तैयार करने में।

    अन्य प्राधिकरणों के रुख पर भी कड़ी टिप्पणी

    खंडपीठ ने विभिन्न एजेंसियों के हलफनामों पर भी असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि दिल्ली नगर निगम समाधान सुझाने के बजाय टोल प्लाज़ा को राजस्व स्रोत के रूप में बचाव करने पर केंद्रित रहा। NHAI और गुरुग्राम मेट्रो डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा पर्यावरण मुआवज़े के बंटवारे की मांग का भी जिक्र किया गया। अदालत ने पहले टोल प्लाज़ा बंद करने के सुझाव का हवाला दिया था ताकि जाम और प्रदूषण घटाया जा सके।

    CAQM को दिए गए निर्देश

    अदालत ने अमिकस क्युरी सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह द्वारा रखे गए सुझावों — जैसे वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, थर्मल पावर प्लांट अनुपालन, निर्माण-धूल, सड़क-धूल और पटाखे — पर गौर करते हुए कहा कि CAQM को सभी संबंधित विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर एक समान और वैज्ञानिक कारण-पहचान तैयार करनी होगी।

    खंडपीठ ने निर्देश दिया कि CAQM दो सप्ताह के भीतर चयनित विशेषज्ञों की बैठक बुलाए और निरंतर विचार-विमर्श के आधार पर AQI गिरावट के प्रमुख कारणों की पहचान-रिपोर्ट अदालत और जनता के लिए सार्वजनिक करे। साथ ही आयोग को दीर्घकालिक समाधान तैयार कर चरणबद्ध रूप से लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा गया, जिसमें सबसे अधिक योगदान वाले प्रदूषण स्रोतों को प्राथमिकता दी जाए।

    टोल प्लाज़ा से जुड़े मुद्दे पर अदालत ने कहा कि इसकी पुनर्समीक्षा स्वतंत्र रूप से की जाए और किसी भी हितधारक के रुख से प्रभावित न हो।

    अंत में, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में लंबी तारीखें नहीं दी जाएंगी और न्यायालय इसे लगातार निगरानी में रखेगा।

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