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आगामी एआईबीई के लिए कोर्स 15 दिनों में प्रकाशित होगा; तीन महीने के भीतर परीक्षा कराई जाएगी: सुप्रीम कोर्ट में बीसीआई ने बताया

Shahadat
6 Aug 2022 10:20 AM GMT
आगामी एआईबीई के लिए कोर्स 15 दिनों में प्रकाशित होगा; तीन महीने के भीतर परीक्षा कराई जाएगी: सुप्रीम कोर्ट में बीसीआई ने बताया
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सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने मंगलवार को बताया कि आगामी अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) के लिए कोर्स 15 दिनों के भीतर प्रकाशित किया जाएगा और उसके बाद तीन महीने की अवधि के भीतर परीक्षा आयोजित की जाएगी।

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस. रवींद्र भट और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की पीठ गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की चुनौती की सुनवाई कर रही थी, जिसने अन्य रोजगार वाले व्यक्तियों को अपनी नौकरी से इस्तीफा दिए बिना एडवोकेट के रूप में नामांकन करने की अनुमति दी।

न्यायालय बार परीक्षा की कमियों को दूर करने के लिए और युवा वकीलों के चैंबर प्लेसमेंट के विचार के लिए समय-समय पर भारत में कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आदेश पारित करता रहा है।

इस संबंध में बार काउंसिल को निर्देश दिया गया कि वह कोर्ट को अपने विजन को पूरा करने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराने के लिए हलफनामा दाखिल करे। नवीनतम हलफनामे के अनुसार, बार काउंसिल ने वकील के रूप में नामांकन के लिए अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) के परिणाम घोषित होने के बाद लॉ ग्रेजुएट को नौकरी छोड़ने के लिए 6 महीने का समय देने का प्रस्ताव पारित किया है।

प्रत्येक राज्य बार काउंसिल में एआईबीई के लिए तीन रजिस्टर होंगे -

1. रजिस्टर ए में उन उम्मीदवारों के नाम शामिल होंगे जो एआईबीई पास करते हैं और उन्हें प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और वे कानूनी पेशे में बने रहते हैं।

2. रजिस्टर बी में उन उम्मीदवारों के नाम होंगे जो कहीं और नौकरी में हैं और उन्हें एआईबीई परीक्षा से 6 महीने की अवधि के भीतर अपनी नौकरी छोड़ने के साथ एआईबीई में उपस्थित होने की अनुमति दी गई है। गौरतलब है कि ऐसे उम्मीदवारों की वरिष्ठता की गणना उनके रोजगार छोड़ने की तारीख से की जाएगी और उन्हें रोजगार प्रमाण पत्र (सीओपी) जारी किया जाएगा, जब वे यह वचन देंगे कि उन्होंने रोजगार छोड़ दिया है।

3. रजिस्टर सी में उन व्यक्तियों के नाम शामिल होंगे जो खुद को किसी राज्य बार काउंसिल में नामांकित करते हैं, एआईबीई की मंजूरी लेते हैं और अन्य जगह नौकरी/रोजगार लेने के लिए अपना लाइसेंस निलंबित कर देते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि 'एआईबीई के अपने परिणाम के प्रकाशन की तारीख' से 5 साल से अधिक समय तक रोजगार में रहने वाले लॉ ग्रेजुएट फिर से कानूनी पेशे में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें फिर से एआईबीई परीक्षा पास करने की आवश्यकता होगी।

रजिस्टर ए के संबंध में एमिक्स क्यूरी के.वी. विश्वनाथन ने स्पष्टीकरण मांगा। उनके अनुसार, रजिस्टर ए में उन उम्मीदवारों के नाम शामिल होने चाहिए जिन्होंने कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की और एआईबीई लेने में सक्षम होने के लिए 'रजिस्टर ए' में नामांकित हैं, इसके बाद एआईबीई की मंजूरी पर उनके नाम दर्ज किए जाएंगे।

तदनुसार, बेंच ने पक्षों के लाभ के लिए स्थिति स्पष्ट की। जो व्यक्ति रोजगार में हैं और परीक्षा देने के इच्छुक हैं, वे पहले से बार काउंसिल को अपने रोजगार के बारे में बताएंगे। उन्हें परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। परीक्षा में होने पर वे यह शपथ पत्र प्रस्तुत करेंगे कि छह महीने के भीतर वे कानूनी पेशे में शामिल होने के संबंध में कॉल करेंगे। यदि वे अपने वर्तमान रोजगार को जारी रखने चाहते हैं और फिर बाद में दोबारा कानूनी पेशे में शामिल होने का निर्णय लेते हैं तो उन्हें फिर से एआईबीई परीक्षा को नए सिरे से पास करना होगा। यदि वे उक्त 6 महीनों के भीतर कानूनी पेशे में शामिल होने का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें अपने इस्तीफे का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

एमिक्स क्यूरी के सुझाव पर पीठ ने 'रजिस्टर सी' में संशोधन किया। पीठ ने कहा कि "एआईबीई के परिणाम के प्रकाशन की तारीख से 5 साल" के बजाय इसे "लाइसेंस के निलंबन के 5 साल बाद" के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।

रजिस्टर सी के संबंध में बेंच ने बीसीआई से यह भी विचार करने के लिए कहा कि 'कानूनी या न्यायिक मामलों के साथ संबंध क्या होगा; जिसके लिए एआईबीई परीक्षा को दोबारा लेने की जरूरत नहीं है। बीसीआई ने अपने हलफनामे में सुझाव दिया कि अगर कोई वकील एपीपी या कुछ न्यायिक सेवा या कुछ कॉर्पोरेट या सरकारी कार्यालयों में कानून अधिकारियों की तरह अन्य सेवाओं में है तो उन्हें बार परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है।

बीसीआई ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने विश्वनाथन से बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कानूनी शिक्षा समिति या एआईबीई की निगरानी समिति का हिस्सा बनने का अनुरोध किया। एमिक्स क्यूरी ने पीठ को अवगत कराया कि उन्होंने बीसीआई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, लेकिन वह विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में एआईबीई की निगरानी समिति का हिस्सा हो सकते हैं। पीठ ने कहा कि यदि विश्वनाथन उक्त समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होते हैं तो हितों का टकराव नहीं होगा।

[केस टाइटल: बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम ट्विंकल राहुल रंगाओंकर और अन्य। 2022 की सिविल अपील नंबर 816-817]

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