सुप्रीम कोर्ट ने TMC MLA से कहा: अयोग्यता मामले में जल्द फैसले के लिए हाईकोर्ट जाएं
Shahadat
5 Nov 2026 8:12 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय की नई याचिका का निपटारा किया। इस याचिका में पार्टी के 10 बागी विधायकों (जिनमें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी भी शामिल हैं) के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी। कोर्ट ने उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को कहा।
जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए चट्टोपाध्याय को हाईकोर्ट में उचित अर्जी दाखिल करने की छूट दी। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह इस मामले को एक डिवीजन बेंच के सामने रखें, ताकि इस पर जल्द विचार करके फैसला लिया जा सके।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"हमें लगता है कि इस स्तर पर कलकत्ता हाईकोर्ट जाना ही सही कदम होगा। हम इस याचिका का निपटारा कर रहे हैं और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में उचित याचिका दायर करने की छूट देते हैं। हम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध करते हैं कि वह इस मामले को एक डिवीजन बेंच के सामने रखें, जो इस पर जल्द फैसला ले सके।"
ये अयोग्यता याचिकाएं उन 10 विधायकों के खिलाफ दायर की गई थीं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद पाला बदल लिया। इनमें रिताब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमां अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं।
याचिका में स्पीकर के 8 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही के तहत नोटिस जारी किए गए। चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला न लिए जाने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई को दायर की गईं और लगभग पांच महीने बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं आया। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में स्पीकर से 8 अक्टूबर तक इन याचिकाओं पर फैसला लेने का अनुरोध किया था।
हालांकि, कोर्ट का मानना था कि इस स्तर पर सही उपाय कलकत्ता हाईकोर्ट जाना ही है।

