सुप्रीम कोर्ट का SCBA से निवेदन- चुनावी सुधारों पर 2 नवंबर को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग के नतीजे घोषित न करें

  • सुप्रीम कोर्ट का SCBA से निवेदन- चुनावी सुधारों पर 2 नवंबर को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग के नतीजे घोषित न करें

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को चुनावी सुधारों पर चर्चा करने के लिए 2 नवंबर को अपनी तय जनरल बॉडी मीटिंग करने की अनुमति दी। साथ ही निर्देश दिया कि वोटिंग 'सीक्रेट बैलेट' (गुप्त मतदान) के जरिए होनी चाहिए। इसके नतीजे घोषित नहीं किए जाने चाहिए। नतीजों को एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के सामने पेश करना होगा।

    ये निर्देश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की ओर से गठित एक बेंच ने दिए, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्य कांत कर रहे थे। इससे पहले, कोर्ट द्वारा नियुक्त उस समिति के प्रमुख और सीनियर वकील जयदीप गुप्ता ने इस प्रस्तावित मीटिंग को लेकर चिंता जताई थी, जो SCBA में सुधारों की जांच कर रही है।

    गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि SCBA ने 29 मई के कोर्ट के आदेश से जुड़े दो प्रस्तावों को पास करने के लिए एक विशेष जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई है। इनमें से एक प्रस्ताव 'प्रॉक्सिमिटी कार्ड एंट्री' से जुड़ा है और दूसरा सीनियर सदस्यों से संबंधित है। यह मीटिंग 5 नवंबर को 'SCBA बनाम BD कौशिक' मामले में होने वाली सुनवाई से ठीक पहले बुलाई गई है (इस मामले में कोर्ट SCBA के चुनावी सुधारों की निगरानी कर रहा है)।

    गुप्ता ने कहा कि हालांकि वह किसी प्रस्ताव का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह मीटिंग बिना किसी सलाह-मशविरे के बुलाई गई। ऐसा लगता है कि यह कोर्ट के आदेश के दायरे से बाहर जा रही है, खासकर तब जब इस मामले में सुनवाई के लिए सिर्फ तीन दिन बचे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई प्रस्ताव पास हो जाता है तो वह तुरंत लागू (बाध्यकारी) हो जाएगा।

    SCBA के अध्यक्ष और सीनियर वकील प्रदीप राय ने जवाब दिया कि एसोसिएशन अपने सदस्यों की राय जानना चाहता है और किसी भी चिंता को कोर्ट में आने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता था।

    राय ने कहा,

    "कोर्ट में आने के बजाय, हम इसे आपस में सुलझा सकते थे। कोर्ट का कीमती समय क्यों बर्बाद करना?"

    उन्होंने आगे कहा कि कार्यकारी समिति कोई भी राय बनाने से पहले अपने सदस्यों से सलाह लेना चाहती है।

    CJI सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति के प्रस्तावों का मकसद असली वकीलों को मजबूत करना है, न कि उनके अधिकारों को कम करना।

    चीफ जस्टिस ने कहा,

    "जो लोग वास्तव में नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट आते हैं, जिन्हें बार, इस संस्था और पूरी व्यवस्था में दिलचस्पी है, हम उन्हें मजबूत करना चाहते हैं। जो बाहरी लोग हैं, जिनका इस पेशे से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें अलग किया जाना चाहिए और बाहर रखा जाना चाहिए।"

    अंत में, कोर्ट ने तय शर्तों के साथ मीटिंग करने की अनुमति दी।

    सीजेआई सूर्य कांत ने निर्देश दिया,

    "चूंकि आपने बैठक बुला ली है तो आप आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन इसका नतीजा घोषित न करें। इसे एक सीलबंद लिफाफे में रखें और अदालत के सामने पेश करें।"

    CJI ने SCBA के पदाधिकारियों और अदालत द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों सहित सभी पक्षों से यह भी आग्रह किया कि वे अगली सुनवाई की तारीख पर मौजूद रहें और अदालत की सहायता करें।

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