हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ 2 याचिकाएं दायर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल मस्जिद कमेटी के गुटों से विवाद सुलझाने को कहा
Shahadat
6 May 2026 10:18 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संभल मस्जिद कमेटी के विरोधी गुटों से अपना अंदरूनी विवाद सुलझाने को कहा। कोर्ट ने पाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक ही फैसले के खिलाफ अलग-अलग वकीलों के ज़रिए दो स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की गईं।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,
"बोर्ड को प्रस्ताव पारित करने दीजिए। हम आपकी दरगाह के मामलों में दखल नहीं देना चाहते। यह आप लोगों के बीच का मामला है। हम इसमें शामिल नहीं होना चाहते। आप लोग बैठकर इसे आपस में सुलझा लीजिए। हमारे लिए इस मामले में पड़ना काफी शर्मनाक है।"
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश को सही ठहराया गया कि मस्जिद का सर्वे करने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए। यह निर्देश एक ऐसे मुकदमे के सिलसिले में दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मस्जिद को एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया।
शुरुआत में ही जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यह पहली बार है, जब कोर्ट के सामने ऐसा मामला आया है, जिसमें एक ही आदेश के खिलाफ अलग-अलग वकीलों ने दो SLP दायर कीं।
सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने कोर्ट को बताया कि वह उस व्यक्ति की तरफ से पेश हो रहे हैं, जिसने मूल मुकदमे में 'वकालतनामा' (वकील नियुक्त करने का अधिकार पत्र) दायर किया। दूसरी SLP के याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह कमेटी के सचिव का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि अहमदी उपाध्यक्ष की तरफ से पेश हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह काफी लंबे समय से इस मामले को देख रहे हैं।
जस्टिस नरसिम्हा ने इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और दोनों पक्षकारों से कहा कि वे इस मुद्दे को आपस में ही सुलझा लें। अहमदी ने कहा कि दूसरा पक्ष झुकने को तैयार नहीं है और उनकी SLP पूरी तरह से अधिकृत (सही) है।
जस्टिस नरसिम्हा ने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे बोर्ड के ज़रिए एक प्रस्ताव पारित करवाकर इस विवाद को आपस में ही सुलझा लें, क्योंकि कोर्ट उनके अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देना चाहता।
प्रतिवादी (जो मूल मुकदमे में वादी थे) की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने दलील दी कि वकीलों के अधिकार से जुड़े सवालों की जांच सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी रखने के बजाय ट्रायल कोर्ट में की जा सकती है।
अहमदी ने इस बात का विरोध करते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 'इंजंक्शन' (अदालती रोक) लगा रखी है तो फिर ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी रखने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
बेंच ने दोनों पक्षकारों से कहा कि वे इस मुद्दे को आपस में सुलझा लें, क्योंकि कोर्ट इस मामले को और ज़्यादा लंबा नहीं खींचना चाहता। बेंच ने यह भी कहा कि इस मामले को पहले भी कई बार सुनवाई के लिए टाला जा चुका है। बेंच ने संकेत दिया कि जैसे ही यह मुद्दा सुलझ जाएगा, इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई अगले मंगलवार के लिए तय की गई।
Case Details – Committee of Management Jami Masjid, Sambhal v. Hari Shankar Jain | SLP (C) Diary No. 46111 of 2025 (AoR Anil Kumar) and Committee of Management, Jami Masjid Sambhal, Ahmed Marg Kot Sambhal v. Hari Shankar Jain | SLP (C) 21599/2025 (AoR Fuzail Ahmad)

