सुप्रीम कोर्ट ने MEA से कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करे

  • सुप्रीम कोर्ट ने MEA से कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करे

    बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) से कहा कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाने के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करे। कोर्ट ने गौर किया कि 51 लोगों की मौत की खबर होने के बावजूद, अब तक केवल छह परिवारों ने ही मुआवजे की मांग की।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों को रूसी अधिकारियों से मुआवजा दिलाने में मदद करे। कोर्ट ने मंत्रालय से यह भी कहा कि वह रूसी अधिकारियों द्वारा तय की गई मुआवजे की रकम और परिवारों को वास्तव में दी गई रकम का विवरण रिकॉर्ड पर रखे।

    कोर्ट ने कहा,

    "यह स्पष्ट है कि पीड़ितों के अन्य परिजनों को भी मुआवजे की मांग करने के उनके अधिकार के बारे में पता होना चाहिए। हमें बताया गया है कि विदेश मंत्रालय जरूरी दस्तावेज और जानकारी जुटाने के लिए इन परिवारों से एक-एक करके संपर्क कर रहा है। विदेश मंत्रालय के लिए यह बेहतर होगा कि वह एक सार्वजनिक नोटिस जारी करके मुआवजे के दावे मंगाए और फिर इन परिवारों को मुआवजा दिलाने में पूरी मदद करे। इस संबंध में हम उम्मीद करते हैं कि विदेश मंत्रालय की ओर से एक नई स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) पेश की जाएगी।"

    कोर्ट ने यह आदेश 26 भारतीय नागरिकों के परिजनों द्वारा दायर रिट याचिका पर दिया। इन लोगों का आरोप है कि वे रोजगार की तलाश में रूस गए, लेकिन उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भारतीयों की भर्ती में धोखा दिया गया और मानव तस्करी की गई।

    31 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, जो रूस गए उन भारतीय नागरिकों के परिवारों के साथ समन्वय कर सके, जिनकी मौत हो गई या जो घायल हुए हैं। कोर्ट ने मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि वह शवों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की व्यवस्था करे, परिवारों को रूसी अधिकारियों से मुआवजा मांगने की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में बताए और यह सुनिश्चित करे कि मुआवजे के लंबित दावों की वजह से शव सौंपने में कोई देरी न हो। इसके अलावा, कोर्ट ने कानूनी सेवा प्राधिकरणों (Legal Services Authorities) को निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुआवजे के दावे दायर करने और DNA टेस्ट कराने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करें।

    विदेश मंत्रालय (MEA) ने 12 अक्टूबर को दाखिल अपनी ताजा स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि लगभग 267 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए। इनमें से 139 लोगों को सेवा से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया, जबकि 51 लोगों की मौत की खबर है। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि मंत्रालय और मॉस्को में भारतीय राजदूत, 77 भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए रूसी अधिकारियों के संपर्क में हैं। इनमें वे 7 लोग भी शामिल हैं, जिनके लापता होने की पुष्टि रूसी अधिकारियों ने की है।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने बेंच को बताया कि भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों को मुआवजे के लिए चार आवेदन भेजे हैं। एक परिवार को मुआवजे की पूरी रकम मिल चुकी है, जबकि दूसरे परिवार को आंशिक भुगतान मिला है। चार अन्य परिवारों ने मुआवजे के लिए सीधे रूसी अधिकारियों से संपर्क किया था।

    CJI कांत ने गौर किया कि मौतों की खबरों के बावजूद, केवल 6 परिवारों के मामले में ही मुआवजे का दावा आगे बढ़ाया गया।

    जस्टिस बागची ने ASG से सप्लीमेंट्री (पूरक) स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, जिसमें यह बताया जाए कि रूसी सरकार ने मुआवजे की कितनी रकम तय की और क्या परिवारों को वास्तव में वह रकम मिल गई।

    भाटी ने बताया कि विदेश मंत्रालय (MEA) परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहा है, ताकि उनके दावों को प्रोसेस करने के लिए जरूरी जानकारी और दस्तावेज जुटाए जा सकें। हालांकि, कोर्ट ने मंत्रालय से कहा कि वे इन प्रयासों के साथ-साथ सार्वजनिक नोटिस भी जारी करें, ताकि अन्य पात्र परिवार भी अपने दावे पेश कर सकें।

    कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह परिवारों को मुआवजा दिलाने में पूरी मदद करे और उठाए गए कदमों के बारे में एक नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे।

    सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि रूसी अधिकारी मुआवजे की मांग करने वाले परिवारों से रूस आने (कभी-कभी दो बार) और वहां बैंक खाते खोलने के लिए कह रहे हैं। वकील ने कहा कि इससे उन परिवारों के लिए व्यावहारिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं, जो मारे गए प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा कर रहे हैं।

    उन्होंने केंद्र सरकार से यह पता लगाने का आग्रह किया कि क्या मुआवजे के दावे भारत में स्थित रूसी दूतावास के जरिए जमा किए जा सकते हैं, जिसमें दिल्ली में काम कर रहे रूसी बैंकों में खाते खोलना भी शामिल हो सकता है।

    जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ताओं से प्रस्तावों की एक सूची तैयार करने और ASG के साथ उन पर चर्चा करने को कहा, ताकि संबंधित मंत्रालय इस प्रक्रिया को सरल बनाने के तरीकों पर विचार कर सकें।

    ASG भाटी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखेगी।

    उन्होंने कहा,

    "मैं कोर्ट को विश्वास दिलाता हूं कि हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि यह मामला रूसी पक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है, फिर भी हम इसे जितना संभव हो सके, उतना सरल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करना जारी रखेंगे और अन्य सभी अनुरोधों को भी रूसी पक्ष के सामने उठाते रहेंगे। अंततः, हमारे राजनयिक और कांसुलर प्रयास ही इसमें मददगार साबित होंगे।"

    जस्टिस बागची ने विदेश मंत्रालय (MEA) से यह भी कहा कि वे संघर्ष वाले क्षेत्रों में मानव तस्करी के शिकार हुए भारतीय नागरिकों और नाविकों के लिए मानक प्रक्रियाएं (standard procedures) और सहायता योजनाएं विकसित करने पर विचार करें।

    विदेश मंत्रालय की नवीनतम स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मंत्रालय को जानकारी है कि कई भारतीय नागरिक काम, शिक्षा या पर्यटन वीजा पर रूस जा रहे हैं। वहां वे वित्तीय बोनस और अन्य लाभ पाने की उम्मीद में सेना में शामिल हो रहे हैं। बाद में अपनी रिहाई की उम्मीद भी रखते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ भारतीय नागरिकों को वापस स्वदेश भेजे जाने के बाद, वे फिर से रूसी सेना में शामिल हो गए।

    मंत्रालय ने 30 सितंबर, 2026 को एक और एडवाइजरी जारी की, जिसमें रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होने के खतरों के बारे में फिर से चेतावनी दी गई। स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जब यह पता चला कि कुछ निजी समूहों और अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं के जरिए भर्ती की जा रही है तो विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी कि वे केवल मंत्रालय के साथ पंजीकृत एजेंटों से मिले जॉब ऑफर पर ही भरोसा करें।

    स्टेटस रिपोर्ट में आगे बताया गया कि भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे भारतीय नागरिकों को रूसी पासपोर्ट जारी करने से पहले उनसे 'भारतीय नागरिकता छोड़ने का प्रमाण पत्र' (Certificate of Renunciation of Indian Citizenship) मांगें।

    अपने नवीनतम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के 'जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों' (District Legal Services Authorities) के सदस्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे 31 जुलाई, 2026 को जारी किए गए निर्देशों का पालन करें। इन निर्देशों के तहत, प्रभावित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता दी जानी है, ताकि वे मुआवजे के दावे दाखिल कर सकें और DNA टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

    Case Title : Divya v. Union of India

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