सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स से गंभीर अपराधों में ट्रायल पर रोक लगाने वाले मामलों को प्राथमिकता देने को कहा
Shahadat
9 Jan 2026 10:49 AM IST

एक अंतरिम आदेश के कारण 23 साल से ज़्यादा समय से पेंडिंग पड़े एक क्रिमिनल रिवीजन पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (8 जनवरी) को सभी हाई कोर्ट्स से ऐसे मामलों को तुरंत उठाने को कहा, जिनमें हत्या, बलात्कार और दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराधों में ट्रायल हाईकोर्ट्स द्वारा पारित अंतरिम आदेशों के कारण रुके हुए हैं।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा,
"अगर हाईकोर्ट्स द्वारा पारित अंतरिम आदेशों के आधार पर ऐसे गंभीर अपराधों में क्रिमिनल ट्रायल सालों तक पेंडिंग रहते हैं तो यह न्याय का मज़ाक उड़ाने जैसा होगा। सभी पक्षों के साथ न्याय होना चाहिए। न्याय सिर्फ़ आरोपी व्यक्तियों के साथ नहीं हो सकता। न्याय पीड़ित और पीड़ित के परिवार के सदस्यों के साथ भी होना चाहिए। कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा है।"
बेंच ने "सभी हाईकोर्ट्स के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि जिन याचिकाओं में अंतरिम आदेश पारित किए गए और ट्रायल रुके हुए हैं, उन्हें तुरंत सुनवाई के लिए लिया जाए, खासकर हत्या, दहेज हत्या, बलात्कार आदि जैसे संवेदनशील और गंभीर मामलों में।"
यह मामला शादी के एक साल के भीतर एक महिला की मौत से जुड़ा था, जिसके कारण 2002 में दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई। हालांकि उसी साल आरोप तय किए गए, लेकिन 2003 में राजस्थान हाईकोर्ट में एक क्रिमिनल रिवीजन के कारण ट्रायल रोक दिया गया, जो लगभग दो दशकों तक पेंडिंग रहा और 2023 में ही सुनवाई के लिए लिया गया, जिसके बाद 2025 में इसे खारिज कर दिया गया, जिससे आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
अपील खारिज करते हुए बेंच ने शुरुआत में टिप्पणी की,
"यह मुक़दमा बहुत परेशान करने वाला है। हम जो रिकॉर्ड करने वाले हैं, वह बहुत दर्दनाक है। इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है, यह केवल हमारी तरफ से की गई विस्तृत जांच ही तय करेगी।"
इसके अलावा, बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट में संस्थागत देरी पर भी हैरानी जताई, जिसने इतने गंभीर अपराध में ट्रायल को लगभग दो दशकों तक पेंडिंग रखा था।
कोर्ट ने कहा,
“हम हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से यह भी जानना चाहते हैं कि 2001 और 2026 के बीच कितनी क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं सुनी गईं और उनका निपटारा किया गया। हम चाहते हैं कि हाईकोर्ट हमें यह ब्रेकअप दे कि साल 2001 में कितनी क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं दायर की गईं और कितनी का निपटारा किया गया। हम यह ब्रेकअप 2026 तक चाहते हैं।”
इसके अलावा, कोर्ट ने हाईकोर्ट से पूछा,
“याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका को दायर करने की तारीख से लेकर खारिज होने की तारीख तक कितनी बार सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया।”
साथ ही कोर्ट ने राजस्थान सरकार की आलोचना की कि वह चुप रही और क्रिमिनल रिवीजन याचिका की सुनवाई और मेरिट के आधार पर फैसला करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
कोर्ट ने पूछा,
“23 साल की इस बीच की अवधि में राजस्थान सरकार चुप क्यों रही और क्रिमिनल रिवीजन याचिका की सुनवाई और मेरिट के आधार पर फैसला करवाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया।”
कोर्ट ने आदेश की कॉपी “सभी हाईकोर्ट के सेक्रेटरी जनरल/रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया ताकि इसे माननीय चीफ जस्टिस के सामने रखा जा सके।”
हाईकोर्ट से फाइल मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, ताकि आगे के आदेश दिए जा सकें।
Cause Title: VIJAY KUMAR & ORS. VERSUS THE STATE OF RAJASTHAN

