क्या प्रोफ़ेसर अली खान महमूदबाद के खिलाफ़ केस बंद किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा
Shahadat
6 Jan 2026 4:29 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हरियाणा राज्य एक बार की दरियादिली दिखाते हुए ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक मामले में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अली खान महमूदबाद पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी न दे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राज्य ऐसी नरमी दिखाने को तैयार है तो यह ज़रूरी है कि महमूदबाद भी भविष्य में 'ज़िम्मेदारी से पेश आएं'।
चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।
चीफ़ जस्टिस ने शुरुआत में टिप्पणी की,
"क्या सरकार मंज़ूरी देने को तैयार नहीं है?"
हरियाणा राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने बताया कि महमूदबाद पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी अभी भी पेंडिंग है।
जस्टिस बागची ने पूछा,
"यह कब से पेंडिंग है? आपने चार्जशीट कब दाखिल की थी?"
ASG ने जवाब दिया कि चार्जशीट 22 अगस्त, 2025 को दाखिल की गई थी।
इस मौके पर चीफ़ जस्टिस ने मौखिक रूप से कहा कि अगर राज्य नरमी बरत रहा है तो कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा।
उन्होंने कहा,
"अगर, मान लीजिए सक्षम अथॉरिटी एक राय ले रही है, कि एक बार की तरह - नरमी बरतते हुए इस मुद्दे को बंद किया जा सकता है... उस स्थिति में हमें मामले की मेरिट में जाने की ज़रूरत नहीं है।"
ASG ने जवाब दिया कि वह इस पर निर्देश लेंगे।
हालांकि, चीफ़ जस्टिस ने साफ किया कि अगर कोर्ट मामला बंद कर देता है, तो प्रोफ़ेसर से भी ज़िम्मेदारी से काम करने की उम्मीद है।
उन्होंने इस संबंध में कहा,
"हम यह भी नहीं चाहते कि वह ऐसा बन जाए.... जिस पल हम कहते हैं कि हम बंद कर रहे हैं... तो वह कहेगा कि - अब मैं कुछ भी लिखना शुरू कर दूंगा... उसे भी बहुत ज़िम्मेदारी से काम करना होगा.... अगर वे (राज्य) दरियादिली दिखाते हैं, तो हमें भी उतनी ही ज़िम्मेदार होना चाहिए।"
महमूदबाद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने उपरोक्त टिप्पणी से सहमति जताई।
बेंच ने आगे यह आदेश दिया:
"ASG SV राजू ने बताया कि अगस्त 2025 में चार्जशीट दायर की गई, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक कोई मंज़ूरी नहीं दी। वह इस बारे में साफ़ निर्देश लेने के लिए और समय चाहते हैं कि क्या राज्य सरकार एक बार की उदारता दिखाते हुए मंज़ूरी न देने और मामले को खत्म करने का मन बना रही है। हम इस मामले को 6 हफ़्ते बाद के लिए पोस्टपोन करते हैं, अंतरिम निर्देश जारी रहेगा।"
CJI ने आगे टिप्पणी की,
"मान लीजिए कि राज्य यह तय करता है कि अब इस मामले को खत्म किया जा सकता है तो मामला खत्म हो जाएगा। हमें पूरा यकीन है कि वह भी ज़िम्मेदारी से पेश आएंगे।"
Case Details : MOHAMMAD AMIR AHMAD @ ALI KHAN MAHMUDABAD Versus STATE OF HARYANA | W.P.(Crl.) No. 219/2025

