सुप्रीम कोर्ट का ED से सवाल- क्या TMC को रोज़मर्रा के कामकाज के लिए फ्रीज़ अकाउंट्स से पैसों का इस्तेमाल कर सकती है?

Shahadat

3 Aug 2026 2:50 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट का ED से सवाल- क्या TMC को रोज़मर्रा के कामकाज के लिए फ्रीज़ अकाउंट्स से पैसों का इस्तेमाल कर सकती है?

    एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) द्वारा फ्रीज़ किए गए बैंक अकाउंट्स को चलाने की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि पार्टी के रोज़मर्रा के कामकाज को संभालने के लिए हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर के पास कुछ रकम छोड़ दी जाए।

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच TMC की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के 20 जुलाई के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में पार्टी को PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में ED द्वारा फ्रीज़ किए गए 3 HDFC बैंक खातों को चलाने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया गया था।

    ED ने TMC के 3 बैंक अकाउंट्स फ्रीज़ किए हैं, जिनमें कथित तौर पर लगभग ₹440 करोड़ हैं। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई एक एयरक्राफ्ट और एक हेलीकॉप्टर की कथित खरीद के सिलसिले में अप्रैल 2023 और जून 2026 के बीच केयरवेल एविएशन इंडिया और उससे जुड़ी एक कंपनी को फंड ट्रांसफर करने की कथित जांच का हिस्सा है।

    सुनवाई के दौरान, ED की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि जिस आदेश को चुनौती दी गई, वह एक अंतरिम आदेश था और पार्टी के सभी अकाउंट्स फ्रीज़ नहीं किए गए। अपराध से मिली रकम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने दावा किया कि पार्टी के फ्रीज़ किए गए अकाउंट्स से अभी भी पैसे निकल रहे हैं, इसलिए यह रकम लगातार बढ़ रही है। यह भी बताया गया कि 164 करोड़ रुपये की रकम अटैच नहीं की गई।

    हालांकि, याचिकाकर्ता-AIMTC की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने दावा किया कि पार्टी के अकाउंट्स फ्रीज़ कर दिए गए थे, इसलिए उनमें से किसी भी रकम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सिब्बल ने ASG से यह साबित करने के लिए एक भी ट्रांज़ैक्शन दिखाने को कहा कि अकाउंट्स से पैसे निकल रहे थे। दूसरी ओर, गुरुस्वामी ने बताया कि पार्टी का कामकाज ठप हो गया, क्योंकि वह अपने कर्मचारियों की सैलरी भी नहीं दे पा रही है।

    दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस सुंदरेश ने स्पष्ट किया कि कोर्ट मामले की मेरिट (गुण-दोष) पर विचार नहीं करेगा (क्योंकि मामला हाईकोर्ट में लंबित है)। जज ने आगे सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता के रोज़मर्रा के कामकाज को संभालने के लिए हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर के पास कुछ रकम छोड़ दी जाए।

    ASG को निर्देश लेने का मौका देने के लिए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई।

    Case Title: ALL INDIA TRINAMOOL CONGRESS AND ANR v. UNION OF INDIA AND ORS.

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