APAAR ID योजना: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा- पूरे देश में लागू करे ओडिशा हाईकोर्ट का आदेश, अभिभावकों को 'ना' कहने का विकल्प मिले

Praveen Mishra

20 July 2026 10:59 PM IST

  • APAAR ID योजना: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा- पूरे देश में लागू करे ओडिशा हाईकोर्ट का आदेश, अभिभावकों को ना कहने का विकल्प मिले

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश देगा कि वह APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) ID के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल सहमति (Consent) फॉर्म में पूरे देश में ऐसा प्रावधान लागू करे, जिससे अभिभावकों को योजना में शामिल होने से इनकार (Opt-out) करने का स्पष्ट विकल्प मिल सके।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ छात्रों के APAAR ID योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि यह योजना व्यवहार में छात्रों को आधार (Aadhaar) बनवाने के लिए मजबूर करती है और इससे बच्चों की निजता (Privacy) तथा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि सरकार भले ही APAAR योजना को स्वैच्छिक (Voluntary) बताती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि APAAR ID आधार से जुड़ी हुई है और कई स्कूल परीक्षा में बैठने के लिए इसे अनिवार्य बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा संवैधानिक अधिकार है और इसे आधार या APAAR ID से नहीं जोड़ा जा सकता।

    जयसिंह ने यह भी कहा कि मौजूदा सहमति फॉर्म में अभिभावकों को शुरुआत में ही योजना से इनकार करने का विकल्प नहीं दिया गया है। उन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 (DPDP Act) का हवाला देते हुए कहा कि अभिभावकों को सूचित सहमति (Informed Consent), सहमति वापस लेने का अधिकार और बच्चों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने योजना के उद्देश्य का समर्थन करते हुए कहा कि हर छात्र के लिए एक यूनिक अकादमिक आईडी होना शिक्षा व्यवस्था के बेहतर संचालन, छात्रों के रिकॉर्ड के रखरखाव और शिक्षक-छात्र अनुपात की निगरानी के लिए उपयोगी कदम है। उन्होंने कहा, "देश में हर चीज को संदेह की नजर से नहीं देखना चाहिए। यह एक स्वागत योग्य पहल है।"

    इस दौरान जयसिंह ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें केंद्र सरकार को APAAR के मॉडल सहमति फॉर्म में अभिभावकों के लिए 'सहमति देने से इनकार' (Refuse Consent) और 'योजना से बाहर निकलने' (Opt-out) का स्पष्ट विकल्प जोड़ने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि इस आदेश को पूरे देश में लागू किया जाए।

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। जब बताया गया कि उस फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है, तो पीठ ने कहा कि वह CBSE को पूरे देश में ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देशों को लागू करने का आदेश देगी। अदालत ने यह भी कहा कि CBSE को याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई निजता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भी विचार करना होगा।

    क्या है APAAR योजना?

    केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2023 को 'वन स्टूडेंट, वन यूनिक आईडी' पहल के तहत APAAR योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक छात्र को आधार से जुड़ी एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान (Academic ID) प्रदान करना है, ताकि उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड और उपलब्धियों का जीवनभर डिजिटल रूप से सुरक्षित और एकीकृत रिकॉर्ड रखा जा सके।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आधार से जुड़ी इस आजीवन अकादमिक पहचान और उससे संबंधित डेटा प्रोसेसिंग व्यवस्था छात्रों के निजता के अधिकार, शिक्षा के अधिकार तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21A का उल्लंघन करती है। उन्होंने यह भी मांग की है कि APAAR में शामिल न होने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न किया जाए और उन्हें प्रवेश, परीक्षा, अंकपत्र या प्रमाणपत्र से वंचित न किया जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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