AOR परीक्षा रद्द करने के फैसले से नाराज़ वकील CJI को दें प्रतिनिधित्व: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

11 May 2026 3:29 PM IST

  • AOR परीक्षा रद्द करने के फैसले से नाराज़ वकील CJI को दें प्रतिनिधित्व: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को उन याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा वर्ष 2026 में एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) परीक्षा आयोजित न करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर न्यायिक पक्ष (Judicial Side) में विचार नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चीफ जस्टिस के समक्ष प्रशासनिक पक्ष (Administrative Side) पर विस्तृत प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी।

    पीठ ने कहा, “न्याय के हित में यह उचित होगा कि याचिकाकर्ता मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व दें। हमें विश्वास है कि मुख्य न्यायाधीश इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।” अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिनों के भीतर प्रतिनिधित्व दाखिल करने का निर्देश दिया।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, “हमारे पास सबसे सहानुभूतिपूर्ण मुख्य न्यायाधीश हैं, हमें भरोसा है कि इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा।” जस्टिस वराले ने भी कहा कि उन्हें सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।

    याचिकाएं उन वकीलों की ओर से दायर की गई थीं जो पिछले वर्ष AOR परीक्षा में कुछ पेपरों से असफल रहे थे और नियमों के तहत उन्हें अगली परीक्षा में दोबारा बैठने की अनुमति मिली थी।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल केवल कुछ पेपरों से परीक्षा पास नहीं कर सके थे और 2026 की परीक्षा रद्द होने से उन्हें गंभीर नुकसान होगा।

    वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि कई अभ्यर्थियों ने पूरे एक वर्ष तक तैयारी की है और वे बहुत कम अंतर से पिछली परीक्षा में असफल हुए थे। उन्होंने सुझाव दिया कि अदालत AOR की संख्या नियंत्रित कर सकती है, लेकिन परीक्षा पूरी तरह बंद नहीं की जानी चाहिए।

    वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने भी इसी तरह की दलील देते हुए कहा कि उनके मुवक्किल केवल एक पेपर से असफल हुए थे और नियमों के अनुसार अगली परीक्षा में बैठने के पात्र थे।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस विवाद पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं करेगा।

    गौरतलब है कि 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स ने वर्ष 2026 में AOR परीक्षा आयोजित न करने का निर्णय लिया था। यह फैसला AOR की कुल संख्या को देखते हुए लिया गया। सुप्रीम कोर्ट हर वर्ष AOR परीक्षा आयोजित करता है और केवल परीक्षा पास करने वाले अधिवक्ता ही सुप्रीम कोर्ट में मामलों की फाइलिंग कर सकते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी अधिसूचना में कहा गया था कि “AOR की कुल संख्या को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 में एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। अगली परीक्षा, जो संभवतः वर्ष 2027 में आयोजित होगी, उसका कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।”

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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