ADAG बैंक ऋण घोटाले की जांच में ED-CBI पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी; अनिल अंबानी ने देश न छोड़ने का आश्वासन दिया

Praveen Mishra

4 Feb 2026 2:30 PM IST

  • ADAG बैंक ऋण घोटाले की जांच में ED-CBI पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी; अनिल अंबानी ने देश न छोड़ने का आश्वासन दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े कथित ₹40,000 करोड़ से अधिक के बैंक ऋण घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की “अस्पष्ट और अनुचित देरी” पर कड़ी नाराज़गी जताई।

    अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विभिन्न बैंकों की शिकायतों के बावजूद केवल एक ही एफआईआर दर्ज करना प्रक्रियात्मक कानून के अनुरूप नहीं है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ, पूर्व केंद्रीय सचिव ई.ए.एस. शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की गई है।

    CBI और ED की कार्यप्रणाली पर सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

    CBI ने वर्ष 2025 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर एक एफआईआर दर्ज की,

    इसके बाद अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों को उसी एफआईआर के दायरे में शामिल कर लिया गया,

    जबकि प्रत्येक बैंक की शिकायत अलग लेन-देन से संबंधित है, जिसके लिए अलग-अलग एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

    खंडपीठ ने टिप्पणी की कि,

    “CBI द्वारा अपनाया गया यह तरीका प्रक्रियात्मक कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।”

    अदालत ने CBI को यह भी निर्देश दिया कि वह बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच करे।

    ED को SIT गठित करने की सलाह

    अदालत ने कहा कि ED और CBI दोनों ने पहले ही काफी समय ले लिया है और अब उनसे त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।

    खंडपीठ ने टिप्पणी की:

    “ED को वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहिए।”

    अनिल अंबानी के देश छोड़ने पर रोक का मुद्दा

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत से अनुरोध किया कि अनिल अंबानी को देश छोड़ने से रोका जाए, क्योंकि पूर्व में कई आर्थिक अपराधी देश छोड़कर भाग चुके हैं।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किए गए हैं।

    अनिल अंबानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वासन दिया कि

    “अनिल अंबानी अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।”

    अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।

    ₹40,000 करोड़ से अधिक की कथित धनराशि की हेराफेरी

    सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि ADAG कंपनियों द्वारा कथित रूप से ₹40,000 करोड़ से अधिक की राशि का गबन किया गया है।

    ED द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार:

    PMLA के तहत 3 मामले दर्ज किए गए हैं,

    ₹12,012 करोड़ मूल्य की 204 संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं,

    46 तलाशी, 305 समन, 213 बयान दर्ज,

    4 गिरफ्तारियां और 2 अभियोजन शिकायतें दाखिल की गई हैं।

    Reliance Communications मामले में अकेले ₹40,000 करोड़ से अधिक के ऋण लिए जाने और ₹20,000 करोड़ से अधिक को “अपराध की आय” बताया गया है।

    हाल ही में R-Com के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को भी गिरफ्तार किया गया है।

    याचिका में क्या कहा गया है?

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि:

    जांच एजेंसियां बैंक अधिकारियों और सार्वजनिक सेवकों की भूमिका को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही हैं,

    SBI द्वारा 2020 में फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बावजूद 2025 में शिकायत दर्ज की गई,

    यह देरी स्वयं संदेह पैदा करती है और बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच आवश्यक है।

    याचिका में कोब्रापोस्ट और ग्रांट थॉर्नटन जैसी जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि:

    समूह की कंपनियों ने शेल कंपनियों, फर्जी लेन-देन और सर्कुलर ट्रांजैक्शनों के जरिए हजारों करोड़ रुपये का गबन किया,

    विदेशी टैक्स हेवन्स के माध्यम से धन भारत लाया गया।

    याचिका में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के साथ-साथ भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।

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