डिग्री होने के बावजूद 29% कोटे में आवेदन कर सकते हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: सुप्रीम कोर्ट

  • डिग्री होने के बावजूद 29% कोटे में आवेदन कर सकते हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ग्रेजुएट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Workers) को 29% कोटे में प्रतिस्पर्धा करने से वंचित नहीं किया जा सकता, जो कि SSLC योग्यता और 10 वर्ष के अनुभव वाले कार्यकर्ताओं के लिए निर्धारित है। अदालत ने कहा कि ग्रेजुएट्स के लिए निर्धारित अतिरिक्त 11% कोटा केवल एक विशेष चैनल (exclusive channel) है, न कि ऐसा प्रावधान जो उन्हें बाकी 29% कोटे से बाहर कर दे।

    जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ग्रेजुएट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल 11% कोटे तक ही सीमित रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके विपरीत केरल प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के निर्णय को बहाल किया।

    मामला क्या था?

    यह विवाद इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम (ICDS) के तहत सुपरवाइजर पदों पर भर्ती से जुड़ा था। नियमों के अनुसार पहले 29% पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आरक्षित थे, जिनके पास SSLC और 10 वर्ष का अनुभव था।

    1 जनवरी 2014 से नियमों में संशोधन के बाद यह कोटा बढ़ाकर 40% कर दिया गया, जिसमें

    29% कोटा SSLC + 10 वर्ष अनुभव वाले कार्यकर्ताओं के लिए

    11% कोटा विशेष रूप से ग्रेजुएट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए निर्धारित किया गया

    विवाद क्यों हुआ?

    भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ ग्रेजुएट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने दोनों—29% और 11%—कोटे में आवेदन किया। इसे SSLC योग्यता वाले कार्यकर्ताओं ने चुनौती दी और कहा कि ग्रेजुएट उम्मीदवारों को केवल 11% कोटे तक सीमित रखा जाना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2014 का संशोधन अलग-अलग (mutually exclusive) कोटे बनाने के लिए नहीं था, बल्कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कुल अवसर बढ़ाने के लिए था।

    अदालत ने स्पष्ट किया:

    11% कोटा सामान्य (open category) भर्ती से अलग निकालकर ग्रेजुएट्स के लिए बनाया गया है

    इससे 29% कोटे पर कोई असर नहीं पड़ता

    यदि कोई उम्मीदवार ग्रेजुएट होने के साथ-साथ SSLC और आवश्यक अनुभव भी रखता है, तो उसे 29% कोटे में आवेदन से नहीं रोका जा सकता

    कोर्ट ने कहा कि नियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि उच्च योग्यता (graduation) रखने वाला उम्मीदवार अयोग्य हो जाएगा।

    महत्वपूर्ण टिप्पणी

    अदालत ने कहा कि:

    उच्च योग्यता को अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता

    11% कोटा इसलिए बनाया गया ताकि कैडर की दक्षता (efficiency) बढ़े, न कि अन्य अवसरों से वंचित किया जाए

    अंतिम निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि:

    मेरिट लिस्ट में शामिल वे उम्मीदवार, जिन्हें 31 नवंबर 2025 से पहले उपलब्ध रिक्तियों पर नियुक्ति मिल सकती थी, उन्हें अब नियुक्त किया जाए

    हालांकि उन्हें पूर्व प्रभाव (retrospective benefit) या सेवा का दावा नहीं मिलेगा

    इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ग्रेजुएट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता 29% कोटे में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और उन्हें इससे बाहर नहीं किया जा सकता।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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