'पुलिस-राजनेता गठजोड़' : YSRCP MLC उदय भास्कर हत्या मामले की ढीली जांच पर सुप्रीम कोर्ट की आंध्र पुलिस को कड़ी फटकार

Praveen Mishra

20 Feb 2026 10:10 PM IST

  • पुलिस-राजनेता गठजोड़ : YSRCP MLC उदय भास्कर हत्या मामले की ढीली जांच पर सुप्रीम कोर्ट की आंध्र पुलिस को कड़ी फटकार

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश पुलिस की 2022 के हत्या मामले में धीमी और लापरवाह जांच पर कड़ी नाराज़गी जताई। यह मामला वाईएसआरसीपी (YSRCP) के एमएलसी अनंता सत्य उदय भास्कर से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस “आरोपी के साथ मिलीभगत” कर रही थी और उसे “थाली में सजाकर डिफॉल्ट बेल देने की हर संभव कोशिश” की गई।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ भास्कर की 2022 में दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी, जिसका लाभ वे अब तक ले रहे हैं।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गंभीर असंतोष जताया कि चार साल बाद भी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि 2024 के चुनाव के बाद सरकार बदलने पर जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया गया और पूर्व सरकार के समय आरोपी के प्रभाव के कारण जांच प्रभावित हुई थी।

    भास्कर पर मई 2022 में अपने चालक, दलित युवक वीधी सुब्रमण्यम की हत्या का आरोप है। पीड़ित परिवार ने अदालत को बताया कि आरोपपत्र (चार्जशीट) 92वें दिन दाखिल किया गया, ताकि आरोपी को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिल सके। हालांकि हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

    राज्य के वकील ने बताया कि पहले दाखिल चार्जशीट एफएसएल रिपोर्ट के अभाव में अधूरी थी और लौटा दी गई थी। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की, “हम समझते हैं कि चार्जशीट जानबूझकर दाखिल नहीं की गई।” बाद में राज्य ने पूरक चार्जशीट दाखिल करने की बात कही।

    कोर्ट ने दोषपूर्ण जांच के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में भी सवाल उठाए। सीजेआई ने कहा, “चार साल में जांच पूरी नहीं हुई। क्या कोई कार्रवाई हुई? यदि डीजीपी अपने अधिकारियों को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो उन्हें पद पर बने रहने का क्या अधिकार है?” न्यायमूर्ति बागची ने भी कहा कि पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि एक जमानत मामला चार साल तक लंबित रखा गया। सीजेआई ने कहा कि जमानत मामलों को एक पंक्ति के आदेश से भी निपटाया जा सकता है।

    ट्रायल तेज करने के निर्देश

    मामले का निपटारा करते हुए पीठ ने कड़ी टिप्पणी की कि पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपी के साथ मिली हुई थीं और उसे डिफॉल्ट बेल दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। कोर्ट ने कहा कि आरोपी दिसंबर 2022 से अंतरिम जमानत पर है और जांच अब तक पूरी नहीं हुई, जो “गंभीर लापरवाही, यदि मिलीभगत नहीं तो” को दर्शाता है।

    अदालत ने ट्रायल को तेजी से पूरा करने के लिए समयसीमा तय करते हुए निम्न निर्देश दिए—

    आगे की जांच 31 मार्च तक पूरी की जाए

    आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम) का निर्णय 18 अप्रैल तक हो

    अभियोजन साक्ष्य 31 अगस्त तक पूरे किए जाएं

    मुकदमे का ट्रायल 30 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाए

    सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि मामले को एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपा जाए, जो साप्ताहिक आधार पर सुनवाई करें। हाईकोर्ट के पोर्टफोलियो जज को भी ट्रायल की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।

    साथ ही हाईकोर्ट को ट्रायल पर रोक लगाने वाला कोई अंतरिम आदेश पारित न करने का निर्देश भी दिया गया।

    आदेश सुनाते समय सीजेआई ने कहा कि यह “पुलिस और राजनीतिक शक्ति के बीच गठजोड़” का स्पष्ट मामला है।

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