सुप्रीम कोर्ट ने NGO 'एनर्जी वॉचडॉग' को बिजली के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही में शामिल होने की इजाज़त दी

Shahadat

4 Sept 2026 6:55 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने NGO एनर्जी वॉचडॉग को बिजली के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही में शामिल होने की इजाज़त दी

    सुप्रीम कोर्ट ने NGO 'एनर्जी वॉचडॉग' को झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा दो कंपनियों के खिलाफ बिजली की कथित अनधिकृत सप्लाई और इस्तेमाल को लेकर शुरू की गई कार्यवाही में शामिल होने की इजाज़त दी।

    जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें NGO को कार्यवाही में शामिल होने की इजाज़त दी गई ताकि ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करने और उस पर विचार करने में आसानी हो। कोर्ट हाईकोर्ट की इस राय से सहमत था कि बिजली की अनधिकृत सप्लाई और इस्तेमाल के खिलाफ NGO की लंबे समय से चली आ रही शिकायत से पता चलता है कि JBVNL द्वारा की गई जांच में सब कुछ ठीक नहीं है।

    याचिकाकर्ता बिजली कंपनियों ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट अपने आप में संपूर्ण कानून है, इसलिए कार्यवाही में किसी तीसरे पक्ष (थर्ड-पार्टी) के दखल की गुंजाइश नहीं है।

    NGO को कार्यवाही में शामिल होने की इजाज़त देने वाले हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की वैधता तक ही अपना फैसला सीमित रखते हुए कोर्ट ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत कार्यवाही में तीसरे पक्ष के दखल के सवाल पर कोई फैसला नहीं सुनाया। कोर्ट ने NGO की भागीदारी के संबंध में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को सही ठहराया और कहा कि NGO की भागीदारी "याचिकाकर्ताओं के अलावा किसी अन्य पक्ष के माध्यम से JBVNL के ध्यान में पूरी सच्चाई लाने के लिए ज़रूरी है, ताकि सही फैसला लिया जा सके।"

    कोर्ट ने कहा,

    "...हमारी राय है कि प्रतिवादी नंबर 1 'एनर्जी वॉचडॉग' द्वारा हाईकोर्ट के सामने पेश किए गए तथ्यों से हाईकोर्ट को यह आभास हुआ कि प्रतिवादी नंबर 1 और 2 के खिलाफ JBVNL द्वारा की जाने वाली जांच में सब कुछ ठीक नहीं है। हाईकोर्ट ने विस्तार से उन परिस्थितियों का ज़िक्र किया, जिनमें प्रतिवादी नंबर 1 और 2 की लंबे समय से चली आ रही शिकायत के बावजूद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ सही समय पर कार्रवाई नहीं की गई।"

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "हमें यकीन है कि JBVNL, 'एनर्जी वॉचडॉग' के सामने पेश की जाने वाली सामग्री के आधार पर पूरी सोच-विचार और सावधानी के साथ अपना फैसला लेगा और मौखिक सुनवाई के निर्देश को कोर्ट या ट्रिब्यूनल की कार्यवाही में नहीं बदलेगा, बल्कि इसे जानकारी इकट्ठा करने के एक ज़रिया के तौर पर इस्तेमाल करेगा ताकि ज़रूरी कार्रवाई शुरू की जा सके।"

    हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि NGO की ऐसी भागीदारी को विवाद का फ़ैसला करने वाली पार्टी का दर्जा नहीं माना जा सकता।

    कोर्ट ने कहा,

    "हालांकि, हम हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल नहीं दे रहे हैं, लेकिन हम यह साफ़ कर देते हैं कि हमने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। अंतिम सुनवाई के समय हाईकोर्ट मामले के सभी पहलुओं पर विचार करेगा, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही में तीसरे पक्ष के दखल का दायरा और सीमा भी शामिल है।"

    Cause Title: M/S. AMALGAM STEELS AND POWER LTD. AND ANR. VERSUS ENERGY WATCHDOG AND ORS.

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