'हम जांच करेंगे': सुप्रीम कोर्ट ने ECI के एकतरफा फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की

  • हम जांच करेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने ECI के एकतरफा फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की

    सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ECI द्वारा कल दाखिल किए गए जवाब (काउंटर-एफिडेविट) पर अपना पक्ष रखने (रिज़ॉइंडर दाखिल करने) के लिए 10 दिन का समय दिया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती दी गई। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कई फैसले - जिनमें मतदाता सूची का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) भी शामिल है - अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

    संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से आग्रह किया कि वह फाइलों की टिप्पणियों (फाइल-नोटिंग्स) और आंतरिक संवादों को सुरक्षित रखने का आदेश दे। उन्होंने कहा कि यह तय करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए या एकतरफा थे।

    सिंघवी ने कहा,

    "यह पूरा मामला निर्णय लेने की प्रक्रिया, आपसी परामर्श और इस बात पर निर्भर करता है कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था या नहीं। इसलिए फाइल-नोटिंग्स आदि को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।"

    इस पर CJI ने जवाब दिया,

    "हमें सब पता है, हम इसकी जांच करेंगे।"

    TMC सांसद डोला सेना की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ECI का हलफनामा याचिकाकर्ताओं के तर्कों की ही पुष्टि करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ने 'फॉर्म 6' के साथ छेड़छाड़ की है, और यहां तक ​​कि प्रेस विज्ञप्ति जारी करके यह दावा भी किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दी।

    ECI की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डॉ. मनिंदर सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया और इसे केवल "बाहरी दिखावे के लिए कही गई बातें" (रेटोरिक) करार दिया।

    मुख्य याचिकाकर्ता राकेश सिंह की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने अपना जवाब (रिज़ॉइंडर) दाखिल करने के लिए समय मांगा। सुनवाई को स्थगित करते हुए बेंच ने इस मामले को 17 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया।

    मुख्य मामले [राकेश कुमार सिंह उर्फ ​​राकेश सिंह बनाम भारत संघ और अन्य] में कोर्ट ने 5 अक्टूबर को नोटिस जारी किया। साथ ही कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाले एकतरफा (एक्स-पार्टे) अंतरिम आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया था। हाल ही में, अपने जवाबी हलफनामे में ECI (चुनाव आयोग) ने एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज किया। आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया। आयोग ने यह भी तर्क दिया कि CEC ज्ञानेश कुमार को काम करने से रोकने की मांग वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसके लिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया, जिसके अनुसार CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।

    बता दें, ये याचिकाएं 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के बाद दायर की गई थीं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - की आपत्तियों के बावजूद, SIR प्रक्रिया से जुड़े कम-से-कम 14 अहम फैसले ECI के नाम पर लिए गए।

    राकेश कुमार सिंह के अलावा, अन्य याचिकाकर्ताओं में वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेता, 'ह्यूमन जस्टिस ऑर्गनाइजेशन', प्रिया मिश्रा, AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी, पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह और पश्चिम बंगाल की सांसद डोला सेन शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या आयोग का कामकाज अनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक ढांचे और 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की धारा 18 में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप था।

    5 अक्टूबर को याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कोर्ट से अंतरिम राहत देने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि लगाए गए आरोप चुनाव आयोग के कामकाज और मतदान अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं।

    सिंह ने कहा,

    "कोर्ट को कुछ अंतरिम आदेश पारित करने होंगे, वरना देश जल उठेगा।"

    बेंच ने प्रतिवादियों की बात सुने बिना मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को निलंबित करने पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा आदेश चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज को ठप कर सकता है।

    बेंच ने सवाल किया,

    "फिर चुनाव कौन कराएगा?"

    सिंह ने सुझाव दिया कि इस बीच बाकी दो चुनाव आयुक्त आयोग का कामकाज संभाल सकते हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि चुनाव आयोग को निर्देश दिए जाएं कि वह अपने फैसले सर्वसम्मति से ले, या जहां सर्वसम्मति संभव न हो, वहां लागू कानूनी ढांचे के अनुसार बहुमत से निर्णय ले। लेकिन कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं किया गया।

    इन दलीलों के जवाब में CJI कांत ने कहा कि आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाला कानून अनिवार्य है, और यदि कोई भी कार्रवाई कानून का उल्लंघन करते हुए पाई जाती है तो कोर्ट उसे रद्द कर देगा।

    जस्टिस बागची ने भी सवाल उठाया कि क्या कोर्ट संबंधित रिकॉर्ड की जांच किए बिना और प्रतिवादियों को सुने बिना, विवादित फैसलों को एकतरफा मानते हुए कोई एकतरफा (Ex-Parte) आदेश पारित कर सकता है।

    अंततः, बेंच ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, और महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया।

    Case Title : Rakesh Kumar Singh alias Rakesh Singh v. Union of India & Ors. and connected matters

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