सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जंगलों की आग को नियंत्रित करने के निर्देश संबंधी पीआईएल की सुनवाई अगले सप्ताह तक स्थगित की

LiveLaw News Network

4 Jan 2021 4:17 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जंगलों की आग को नियंत्रित करने के निर्देश संबंधी पीआईएल की सुनवाई अगले सप्ताह तक स्थगित की

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जंगल में लगी आग रोकने के लिए कदम उठाने का राज्य सरकार को निर्देश दिये जाने तथा क्षेत्र के वन्यजीवों को उनके अधिकारों के साथ लिविंग एंटिटी मानने संबंधी याचिका अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

    मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की खंडपीठ को पिटीशनर इन पर्सन ऋतुपर्ण उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2016 में इस बाबत पहले से ही दिशानिर्देश जारी किये हुए हैं।

    तदनुसार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी दलील रिकॉर्ड में दर्ज करायें। इसके बाद उसने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए टाल दी।

    उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल निवासी याचिकाकर्ता ने उस मीडिया रिपोर्ट के बाद बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसके अनुसार 2019 में उत्तराखंड के जंगलों में आग की 1451 घटनाओं से संबंधित खबरें प्रकाशित एवं प्रसारित की गयी थीं।

    उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तराखंड को 2001 में अलग राज्य का दर्जा दिये जाने से लेकर अभी तक राज्य को 44 हजार हेक्टेयर वन समाप्त हो चुके हैं, जो लगभग 61 हजार फुटबॉल मैदान के बराबर हैं।

    याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि पक्षी एवं जलीय पादपों सहित सम्पूर्ण वन्यजीव को लीगल एंटिटी घोषित किया जाये और उन्हें सभी अधिकार प्रदान किये जायें। उन्होंने जंगल की आग के पीछे भू माफिया और टिम्बर माफिया के हाथ होने की जांच कराये जाने की भी मांग की है।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने पैरेन्स पैट्रिएई के सिद्धांत लागू करते हुए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड बनाम ए. नागराज एवं अन्य मामले में व्यवस्था दी थी ककि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मानवाधिकारों एवं जीवन की रक्षा को परिभाषित करते हुए 'जीवन' शब्द को विस्तारित तौर पर परिभाषित किया गया है और मानव जीवन के लिए जरूरी पर्यावरण के नुकसान से होने वाली क्षति को संविधान के अनुच्छेद 21 के दायरे में समाहित किया गया है। पर्यावरण के लिए जरूरी पर्यावरण में पशुओं के जीवन सहित सभी प्रकार का जीवन शामिल है। 'जीवन' का अर्थ मानव जीवन के अस्तित्व और उसके इंस्ट्र्यूमेंटल वैल्यू से कहीं अधिक है, जिसमें जीवन से संबंधित सम्मान और मर्यादा का आंतरिक तत्व मौजूद हो। सभी जानवरों का भी सम्मान और मर्यादा है।

    उनियाल ने कहा,

    "इस प्रकार, जलीय और पादपीय जीवन की रक्षा के क्रम में जानवरों को लीगल एंटिटी/ कानूनी व्यक्ति का दर्जा दिया जाना आवश्यका है।"

    गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जुलाई 2018 में सम्पूर्ण एनिमल किंगडम को लीगल एंटिटी घोषित किया था, जिसे आम व्यक्ति की तरह अधिकार हैं।

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