SIR में आधार के उपयोग पर आपत्ति: सुप्रीम कोर्ट बोला — आरपी एक्ट बदलवाने केंद्र के पास जाएं
Praveen Mishra
24 Feb 2026 1:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) प्रक्रिया में पहचान के लिए आधार कार्ड के उपयोग का विरोध करने वाले एक याचिकाकर्ता से कहा कि जब तक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act) आधार को मान्य दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करता है, तब तक अदालत को भी इसे मानना होगा।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की खंडपीठ पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत की टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को फर्जी आधार कार्ड के व्यापक उपयोग की चिंता है, तो उसे बार-बार अदालत में मुद्दा उठाने के बजाय केंद्र सरकार से कानून में संशोधन कराने के लिए संपर्क करना चाहिए।
एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड बने हुए हैं, खासकर सीमा क्षेत्रों में, और कई मामलों में पकड़े गए बांग्लादेशी या रोहिंग्या व्यक्तियों के पास बंगाल से जारी आधार पाए गए हैं।
इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा हो सकता है और गहन जांच की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन फिलहाल इस पर टिप्पणी करने का उचित समय नहीं है।
“सरकार से कानून संशोधन कराएं”
जस्टिस बागची ने कहा कि यदि बड़े पैमाने पर फर्जी आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं, तो यह विधायी स्तर पर नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार को प्रतिनिधित्व देकर आरपी एक्ट में संशोधन की मांग करें।
उन्होंने कहा कि जब आरपी एक्ट में संशोधन करके आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में शामिल किया गया है, तो अदालत को उसे स्वीकार करना ही होगा। साथ ही स्पष्ट किया कि आधार केवल पहचान का दस्तावेज़ है, नागरिकता का प्रमाण नहीं।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष सितंबर में चुनाव आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया के लिए निर्धारित 11 दस्तावेजों के अतिरिक्त आधार कार्ड को भी सत्यापन दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने की अनुमति दी थी। यह आदेश आरपी एक्ट, 1950 की धारा 23(4) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए दिया गया था, जिसमें आधार को पहचान स्थापित करने के लिए मान्य दस्तावेज़ माना गया है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में जब तक आधार कार्ड मान्य पहचान दस्तावेज़ है, तब तक अदालत उसे खारिज नहीं कर सकती। फर्जी आधार की समस्या का समाधान न्यायालय नहीं बल्कि विधायी स्तर पर किया जाना चाहिए।

