सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस: 22 पुलिसकर्मियों को बरी करने के फ़ैसले को चुनौती देते हुए भाई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

Shahadat

24 Aug 2026 3:28 PM IST

  • सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस: 22 पुलिसकर्मियों को बरी करने के फ़ैसले को चुनौती देते हुए भाई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

    सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत 2005 के सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके साथी तुलसीराम प्रजापति के एनकाउंटर केस में 22 आरोपियों (जिनमें गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं) को बरी कर दिया गया।

    यह याचिका मृतक सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने दायर की। उन्होंने हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी, जिसमें चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अश्विन अंखाड की बेंच ने सभी आरोपियों के बरी होने के ख़िलाफ़ दायर अपीलों को खारिज किया।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2005 में हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रही बस से एक पुलिस टीम ने सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके साथी तुलसीराम प्रजापति का अपहरण कर लिया था। शेख की कथित तौर पर अहमदाबाद के पास एनकाउंटर में हत्या कर दी गई और उनकी पत्नी की हत्या तीन दिन बाद हुई। उनके साथी प्रजापति की हत्या 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक अन्य एनकाउंटर में हुई।

    सुप्रीम कोर्ट ने जांच को गुजरात क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर करने और ट्रायल को गुजरात से मुंबई शिफ्ट करने का निर्देश दिया। प्रजापति के एनकाउंटर में हत्या के मामले को भी शेख के मामले के साथ जोड़ दिया गया।

    210 गवाहों में से 92 गवाह मुकर गए (होस्टाइल हो गए)। 2018 में मुंबई की स्पेशल CBI कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष शेख और अन्य लोगों की हत्या की किसी भी साज़िश का ठोस मामला साबित करने में नाकाम रहा।

    2019 में बरी करने के आदेशों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक अपील दायर की गई थी। हाल ही में 'रुबाबउद्दीन शेख बनाम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन' मामले में इस पर फ़ैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित था, जिसमें "हालातों की कड़ी में कई टूटी हुई कड़ियाँ" थीं। हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि शेख और कौसर बी का अपहरण पुलिस ने किया और वे फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने के पीछे का कोई मकसद भी साबित नहीं कर पाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में गवाहों के मुकर जाने से अपने आप यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि मुक़दमे की कार्यवाही ठीक से नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि कथित एनकाउंटर के पीछे किसी नेता-पुलिस गठजोड़ को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था।

    बॉम्बे हाईकोर्ट के बरी करने के फ़ैसले को चुनौती देते हुए 13 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वकील अचिंत कुमार कर रहे हैं।

    Case: Nayabuddin Shaikh v Central Bureau of Investigation

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