आजकल झूठी शिकायतों से सास और पति सतर्क, धारा 498A बेहद कठोर व दुरुपयोगी: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

27 Sept 2025 9:46 AM IST

  • आजकल झूठी शिकायतों से सास और पति सतर्क, धारा 498A बेहद कठोर व दुरुपयोगी: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बार फिर आईपीसी की धारा 498A (अब भारत न्याय संहिता, 2023 की धारा 84) के दुरुपयोग पर चिंता जताई। यह मामला विवाह के डेढ़ महीने के भीतर पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि अक्सर पति और सास झूठी शिकायतों के डर में रहते हैं। जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की – “498A बहुत कठोर और अक्सर दुरुपयोग की जाने वाली धारा है। यह रिश्ते पर नींबू निचोड़ने जैसा असर डालती है।” कोर्ट ने पति, पत्नी और सास को मध्यस्थता (मेडिएशन) में शामिल होने का निर्देश दिया।


    सुप्रीम कोर्ट हाल के वर्षों में कई बार 498A के दुरुपयोग पर चिंता जता चुका है—


    मई 2024: जस्टिस पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने संसद से आग्रह किया कि नई न्याय संहिता की धारा 85 व 86 (498A के समान) पर पुनर्विचार किया जाए।


    दिसंबर 2024: जस्टिस नागरत्ना की अलग-अलग पीठों ने कहा कि पतियों के पूरे परिवार को फंसाना गलत है और कई बार 498A को 376, 377 व 506 जैसी धाराओं के साथ दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।


    फरवरी 2025: कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आरोपों के घरेलू विवादों में आपराधिक कानून लगाना परिवारों के लिए विनाशकारी हो सकता है।


    अप्रैल 2025: जस्टिस सूर्यकांत और एन. कोटिश्वर ने 498A की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए कहा कि दुरुपयोग की संभावना से कानून असंवैधानिक नहीं हो जाता।


    मई व जून 2025: जस्टिस नागरत्ना की बेंच ने कई मामलों में अस्पष्ट आरोपों पर दर्ज एफआईआर और मुकदमों को रद्द करते हुए कहा कि हर रिश्तेदार को फँसाने की प्रवृत्ति शिकायत की साख को कमजोर करती है।


    कोर्ट ने साफ किया है कि सच्चे मामलों में पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन झूठे और सामान्य आरोपों से कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।


    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story