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सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार समिति के देवघर के SP को पेश होने के समन पर रोक लगाई

LiveLaw News Network
8 Sep 2020 6:00 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार समिति के देवघर के SP को पेश होने के समन पर रोक लगाई
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार समिति के देवघर के अधीक्षक को झारखंड के एक भाजपा सांसद द्वारा दायर शिकायत के संबंध में मंगलवार को पेश होने के आदेश पर रोक लगा दी।

गोड्डा निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने विशेषाधिकार समिति में शिकायत दर्ज कराई है जिसमें दावा किया गया है कि झामुमो की अगुवाई वाली झारखंड सरकार के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाकर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जो एक कानून निर्माता के रूप में उनके काम में बाधा उत्पन्न करने के लक्ष्य के तहत है।

न्यायमूर्ति एलएन राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक एमवी राव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिन्होंने लोकसभा सचिवालय, (विशेषाधिकार और आचार शाखा) और विशेषाधिकार समिति से दुबे की शिकायत पर विशेषाधिकार हनन के लिए कार्यवाही से संबंधित रिकॉर्ड देने के लिए निर्देश मांगा है।

याचिका में शीर्ष अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि वह शिकायत को फिर से दर्ज करने और पुलिस अधीक्षक देवघर को 8 सितंबर को मौखिक साक्ष्य के साथ समिति के समक्ष पेश होने के निर्देश देने की लोकसभा की समिति की कार्रवाई को अवैध और असंवैधानिक घोषित करे।

शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किया है और लोकसभा सचिवालय (विशेषाधिकार और आचार शाखा), विशेषाधिकार समिति और दुबे से याचिका पर जवाब मांगा है।

आदेश में कहा गया है, "चार सप्ताह में वापस करने योग्य नोटिस जारी करते हैं। जुलाई 16, 2020 और 28 अगस्त को दिए गए नोटिस के बाद आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।"

आदेश देने वाली पीठ में जस्टिस हेमंत गुप्ता भी शामिल थे।

याचिकाकर्ता के लिए वरिष्ठ वकील फली नरीमन और वकील अरुणाभ चौधरी और प्रज्ञा बघेल पेश हुए।

यह प्रस्तुत किया गया है कि प्रतिवादी संख्या 3 (दुबे) द्वारा दायर विशेषाधिकार हनन का नोटिस / शिकायत अस्पष्ट है और विशेषाधिकार के उल्लंघन का कोई मामला नहीं बनता है। न्यायिक अपराध के बिना अपराधों को दर्ज करने और जांच करने में विशेषाधिकार समिति के अधिकार का दुरुपयोग और एक संज्ञेयनीय अपराध में पुलिस की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में एक पक्षीय हस्तक्षेप पूर्व-निर्धारित कार्रवाई है, दलीलों में कहा गया है।

जुलाई में, देवघर में, जो गोड्डा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, जो दुबे के परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी के कथित अपराधों के लिए और संपत्ति के मूल्यांकन के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग करने के आरोप में दर्ज की गईं।

आदेश की कॉपी डाउनलोड करें



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