Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फंसे प्रवासियों की पहचान करने में अधिक " चौकन्ना और केंद्रित"  करने को कहा 

LiveLaw News Network
10 Jun 2020 4:43 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फंसे प्रवासियों की पहचान करने में अधिक  चौकन्ना और केंद्रित  करने को कहा 
x

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र को अधिक सतर्क रहने और फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों की पहचान कर उनके मूल स्थानों में भेजने के लिए ठोस प्रयास करने को कहा।

न्यायालय ने यह भी कहा कि इस मुद्दे से निपटने में महाराष्ट्र के अधिकारियों द्वारा प्रयासों में "भारी कमी" दिखाई गई है और "अधिकांश दावे केवल कागजों पर हैं, जिससे प्रवासी श्रमिकों को बहुत दुख और कठिनाई हो रही है"

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति, संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार के 37,000 प्रवासी श्रमिक अपने मूल स्थानों पर लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उन्होंने रेलवे से केवल एक ट्रेन को भेजने का अनुरोध किया है।

न्यायालय ने कहा,

"हमारा विचार है कि राज्य को प्रवासी श्रमिकों की पहचान करने में अधिक सतर्क और केंद्रित प्रयास करना होगा, जो अभी भी महाराष्ट्र राज्य में फंसे हुए हैं और जो अपने मूल स्थानों पर लौटने के इच्छुक हैं।"

बेंच ने आगे कहा,

"सरकार को उन श्रमिकों की पहचान / पंजीकरण के लिए उन स्थानों अर्थात पुलिस स्टेशनों या किसी अन्य उपयुक्त स्थान का प्रचार और घोषणा करनी चाहिए, जिन्हें अभी तक कोई ट्रेन या बस यात्रा प्रदान नहीं की गई है।

राज्य पर्यवेक्षी समिति, जिला पर्यवेक्षक समिति और उसके अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए। सभी प्रवासी मजदूर, जो अपने मूल स्थान पर जाने के इच्छुक हैं, की पहचान की जानी चाहिए, उन्हें भोजन और आश्रय प्रदान करना चाहिए और फंसे हुए प्रवासी मजदूरों द्वारा यात्रा या भोजन की सुविधा उपलब्ध नहीं कराने की कोई शिकायत ना हो।"

शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि हलफनामे में, राज्य ने दावा किया है कि वह प्रवासी श्रमिकों को भोजन और आश्रय प्रदान कर रहा है और पूरे श्रमिकों की सूची तैयार की गई है, लेकिन हस्तक्षेपकर्ताओं सहित विभिन्न रिकॉर्डों पर लाई गई सामग्री और विभिन्न व्यक्तियों ने इस तरह के दावे को विभिन्न हलफ़नामों में खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने आदेश में कहा,

"हम इस स्तर पर नोटिस कर सकते हैं, कि हलफनामे में, राज्य का दावा है कि वह प्रवासी श्रमिकों को भोजन और आश्रय प्रदान कर रहा है और पूरे श्रमिकों की सूची तैयार की गई है, इस तरह के दावे को हस्तक्षेपकर्ताओं और विभिन्न व्यक्तियों द्वारा अलग-अलग हलफ़नामों और रिकॉर्ड में लाई गई सामग्रियों से खारिज कर दिया गया है"

यह प्रस्तुत किया गया है कि प्रवासी मजदूरों को भोजन की कोई उचित व्यवस्था नहीं है और न ही श्रमिकों के पंजीकरण का कोई सरल तरीका है। राज्य की नीतियों और निर्णयों को लागू करने में राज्य के अधिकारियों की ओर से भारी चूक की गई है और अधिकांश दावे केवल कागज पर हैं जो प्रवासी श्रमिकों के लिए बहुत दुख और कठिनाई पैदा करते हैं। ''

अदालत ने प्रवासी मजदूरों के दुख-सुख पर सुने गए मामले में ये टिप्पणियां कीं। पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शेष प्रवासियों को उनके मूल राज्यों में भेजने के लिए 15 दिनों का समय दिया।

न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात ऐसे राज्य हैं जहां से पर्याप्त संख्या में प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल स्थानों पर भेजा गया।

वहीं महाराष्ट्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि 12 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्थानों पर भेजा गया है और उनमें से पांच लाख से अधिक यात्रियों को राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों द्वारा मुफ्त भेजा गया है। लगभग 37,000 प्रवासियों को अभी भी लौटने का इंतजार है।

न्यायालय में दिल्ली सरकार ने भी बताया कि लगभग तीन लाख प्रवासी कामगारों को उनके मूल स्थानों पर 236 रेलगाड़ियों द्वारा भेजा गया है और लगभग 12,000 बसों द्वारा भेजा गया है।

दिल्ली सरकार ने कहा कि लगभग 6.5 लाख लोगों ने पहले ही दिल्ली सरकार के वेब पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा लिया है और लगभग दो लाख प्रवासियों ने उद्योगों को फिर से खोलने के चक्कर में अपने मूल स्थानों पर नहीं जाने का फैसला किया है।

गुजरात ने शीर्ष अदालत को बताया कि राज्य में काम करने वाले 23 लाख प्रवासी कामगारों में से 14 लाख से अधिक को 9 99 श्रमिक गाड़ियों द्वारा उनके मूल स्थानों पर भेजे गए हैं और 5.75 लाख से अधिक प्रवासी बसों द्वारा मूल राज्यों में भेजे गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को सूचित किया कि लगभग 25 लाख प्रवासी श्रमिक सुरक्षित रूप से अपने मूल स्थानों पर लौट आए हैं और सरकार उन्हें उनके गांवों तक अंतिम मील कनेक्टिविटी प्रदान कर रही है।

बिहार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि 28 लाख प्रवासी कर्मचारी राज्य में पहुंच चुके हैं और सरकार परामर्श केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है, जो मजदूरों के कौशल स्तर की जांच करेगा और राज्य में उपलब्ध रोज़गार के विकल्पों का सुझाव देगा।

साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल और अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा किए गए इसी तरह के प्रस्तुतियों को प्रवासी श्रमिकों को भेजने और प्राप्त करने और राज्य सरकार द्वारा उनके पुनर्वास के लिए की गई कल्याणकारी पहल के बारे में शीर्ष अदालत द्वारा अपने आदेश में नोट किया गया था।

28 मई को शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि प्रवासी श्रमिक जो अपने गृह राज्यों में वापस जाना चाहते हैं, उनसे ट्रेन या बस का किराया नहीं लिया जाएगा और देश भर में फंसे लोगों को संबंधित अधिकारियों द्वारा मुफ्त में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



Next Story