दिव्यांगों पर आपत्तिजनक मजाक मामले में समय रैना समेत 5 कॉमेडियंस के खिलाफ FIR रद्द: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
14 Aug 2026 3:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर आपत्तिजनक और असंवेदनशील मजाक करने के मामले में कॉमेडियन समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दीं।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि आरोपियों ने मामले के बाद सुधारात्मक कदम उठाए और दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए।
दिव्यांगों के लिए चेस टूर्नामेंट और फंडरेजिंग कार्यक्रम
कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर गौर किया कि आरोपियों ने 14 से 16 मार्च 2026 के बीच दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक चेस टूर्नामेंट आयोजित किया। इस आयोजन को व्यापक मीडिया कवरेज मिली और इससे दिव्यांगों के लिए काम करने वाले संगठनों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
आरोपियों ने ऐसे संगठनों को दान भी दिया। उन्होंने चार अतिरिक्त फंडरेजिंग शो आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा। हालांकि, लॉजिस्टिक कारणों से इन कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों को विशेष रूप से आमंत्रित नहीं किया जा सका, लेकिन आरोपियों ने SMA से प्रभावित लोगों को शामिल करने और आर्थिक सहायता देने की इच्छा जताई।
Cure Foundation के साथ हुआ रचनात्मक संवाद
पीठ ने कहा कि आरोपियों और याचिकाकर्ता NGO Cure Foundation के बीच रचनात्मक संवाद हुआ। दोनों पक्षों ने Spinal Muscular Atrophy (SMA) के बारे में जागरूकता फैलाने और SMA से प्रभावित लोगों के जीवन व उपलब्धियों को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा की।
आरोपियों ने भविष्य के कार्यक्रम तैयार करते समय NGO से मार्गदर्शन लेने और SMA वॉरियर्स की भागीदारी के लिए उनकी सहमति लेने पर भी सहमति जताई।
कोर्ट ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आरोपियों से उम्मीद की जाती है कि वे आगे भी दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों में योगदान देते रहेंगे।
पहले कोर्ट ने लगाया था ₹3 लाख का जुर्माना
गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए अंडरटेकिंग का पालन न करने पर कॉमेडियंस पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया था और कहा था कि उन्होंने कोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले दिव्यांग व्यक्तियों के साथ बातचीत की थी। उन्होंने इसे जजों के लिए सीखने वाला अनुभव बताया और दिव्यांग व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया।
दिव्यांगों की गरिमा को लेकर गाइडलाइंस पर फैसला बाद में
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों के अपमान और उनकी गरिमा की रक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दे को खुला रखा है। Cure Foundation की याचिका लंबित रखी गई है, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के अपमान को रोकने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की आवश्यकता पर विचार किया जा सके।
कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों और NGO से इस संबंध में सुझाव भी मांगे हैं। साथ ही, आरोपियों द्वारा डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा की गई राशि को NGO के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई।


