NEET-UG 2026 रद्द होना दुखद, NTA ने सबक नहीं सीखा: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
25 May 2026 12:20 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि पेपर लीक होने की वजह से NEET-UG 2026 को रद्द करना पड़ा। कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि दो साल पहले, 2024 में पेपर लीक के संबंध में कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने कोई सबक नहीं सीखा।
कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा NTA को बदलने की मांग वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, और NTA से उस हाई-पावर्ड कमेटी (उच्च-स्तरीय समिति) की सिफारिशों के अनुसार उठाए गए कदमों पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी। इस कमेटी का गठन कोर्ट के 2024 के फैसले के अनुसार, NEET व्यवस्था को मज़बूत करने के उपाय सुझाने के लिए किया गया था।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने इस मामले पर विचार किया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी याचिकाओं की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दी जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील तन्वी दुबे पेश हुईं।
जस्टिस नरसिम्हा ने मौखिक रूप से टिप्पणी की:
"हमें बहुत दुख है, उन्होंने (NTA) कोई सबक नहीं सीखा। हमने आदेश पारित किया था, जिसमें सिफारिशें देने के लिए एक समिति के गठन का निर्देश दिया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था।"
कोर्ट ने आदेश दिया:
"हम NTA को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हैं, जिसमें 14 नवंबर, 2024 को गठित निगरानी समिति के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए। हम पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन को भी हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हैं, जिसमें हाई-पावर्ड कमेटी द्वारा दी गई सिफारिशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख हो; इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह हलफनामा 3 दिनों के भीतर दायर किया जाना चाहिए।"
2024 के NEET UG पेपर लीक की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा इस उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी।
2024 में 'वंशिका यादव बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार किया था, लेकिन कोर्ट ने पेपर लीक से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाओं को रद्द करने के लिए एक मानदंड भी निर्धारित किया था। कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन समिति के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया और समिति को परीक्षा सुरक्षा, पेपरों के परिवहन, CCTV निगरानी, उम्मीदवारों के सत्यापन, एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल, तकनीकी सुरक्षा उपायों, रियल-टाइम निगरानी, शिकायत निवारण और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर सुधारों की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने विशेष रूप से समिति को व्यापक CCTV निगरानी, अचानक निरीक्षण, सुरक्षित परिवहन प्रणालियों, डिजिटल ट्रैकिंग और पहचान सत्यापन के अधिक सख्त तंत्रों की व्यावहारिकता की जांच करने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार ने 17 दिसंबर, 2024 को रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति (HLCE) की सिफारिशों के बाद उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण दिया गया था।
अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, HLCE ने "राष्ट्रीय सामान्य प्रवेश परीक्षा प्रणाली में सुधार" की सिफारिश की, जिसमें NTA को मजबूत करना, राज्यों के साथ संस्थागत समन्वय और विशेष परीक्षा तथा ज्ञान भागीदारों को शामिल करना शामिल है।
ये याचिकाएं NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि में दायर की गई थीं।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) द्वारा दायर याचिका में NEET-UG 2026 परीक्षा आयोजित करने में NTA की "प्रणालीगत विफलता" को देखते हुए NTA को भंग करने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि परीक्षा में 23 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे।
Case Details: FEDERATION OF ALL INDIA MEDICAL ASSOCIATION v NATIONAL TESTING AGENCY AND ORS.|W.P.(C) No. 651/2026

