S. 53 Patents Act | क्या पेटेंट एप्लीकेशन पर फ़ैसला लेने में देरी होने पर पेटेंट टर्म ग्रांट की तारीख से गिनी जानी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट करेगा फ़ैसला
Shahadat
29 Sept 2026 3:39 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने भारत में पेटेंट टर्म एडजस्टमेंट (PTA) के लिए एक सिस्टम पर विचार करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। इसमें यह सवाल उठाया गया कि क्या पेटेंट होल्डर को अतिरिक्त पेटेंट सुरक्षा मिलनी चाहिए, अगर पेटेंट देने में देरी के कारण कानूनी तौर पर तय 20 साल की अवधि का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है।
जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने पेटेंट्स एक्ट, 1970 की धारा 53 को सही ठहराया था, जिसके तहत पेटेंट की अवधि पेटेंट एप्लीकेशन फ़ाइल करने की तारीख से 20 साल होती है।
कोर्ट के सामने मुद्दा यह है कि क्या पेटेंट देने में हुई देरी, फ़ाइल करने की तारीख से गिने जाने वाले 20 साल के कानूनी पेटेंट एकाधिकार (Monopoly) को बढ़ाने को सही ठहरा सकती है।
यह मामला 2 मई, 2005 को फ़ाइल की गई एक पेटेंट एप्लीकेशन से जुड़ा है, जिसे लगभग सात साल बाद 28 दिसंबर, 2012 को मंज़ूरी मिली थी।
याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि भले ही इस दौरान पेटेंट नहीं दिया गया, लेकिन सात साल की देरी पेटेंट की 20 साल की कानूनी अवधि के दौरान ही चलती रही।
व्यावहारिक तौर पर दिसंबर 2012 में दिए गए पेटेंट की अवधि धारा 53 के तहत आम तौर पर मई 2025 में खत्म हो जाएगी, क्योंकि इसकी अवधि 2005 में फ़ाइल करने की तारीख से गिनी जाती है।
इसलिए खुद पेश होने वाले याचिकाकर्ता ने पेटेंट देने की प्रक्रिया में देरी के कारण कथित तौर पर बर्बाद हुई अवधि के लिए मुआवज़े की मांग की, जिसमें पेटेंट की अवधि बढ़ाना भी शामिल है। याचिकाकर्ता ने पेटेंट टर्म एडजस्टमेंट के अमेरिकी मॉडल का ज़िक्र किया, जिसके तहत पेटेंट-ऑफ़िस की कुछ देरी के कारण पेटेंट की अवधि में बदलाव किया जा सकता है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को मानने से इनकार किया कि न्यायिक दखल के ज़रिए PTA का अमेरिकी मॉडल लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि धारा 53 और धारा 11A(7) अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं। धारा 11A(7) पेटेंट एप्लीकेशन के पब्लिकेशन के बाद और पेटेंट मिलने से पहले एप्लीकेंट को मिलने वाले अधिकारों से संबंधित है, जबकि धारा 53 पेटेंट की अवधि को फाइलिंग की तारीख से 20 साल तय करता है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोसेसिंग में देरी के लिए पेटेंट एप्लीकेंट्स को मुआवज़ा देने के लिए नया कानूनी तरीका लाने के लिए कानून बनाने की ज़रूरत होगी, जिसका निर्देश कोर्ट आर्टिकल 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए नहीं दे सकता।
हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की गई।
कोर्ट ने एडवोकेट कृतिका विजय से 'एमिक्स क्यूरी' (न्याय मित्र) के तौर पर मदद करने का अनुरोध किया।
इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर, 2026 को होगी।
Cause Title: GUNJAN SINHA @ KANISHK SINHA & ANR. VERSUS THE UNION OF INDIA & ANR.

