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क्यूरेटिव पिटीशन के साथ सीनियर एडवोकेट का सर्टिफिकेट फाइल करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
25 Oct 2021 4:55 AM GMT
क्यूरेटिव पिटीशन के साथ सीनियर एडवोकेट का सर्टिफिकेट फाइल करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्यूरेटिव पिटीशन के साथ सीनियर एडवोकेट का सर्टिफिकेट दाखिल करना अनिवार्य है।

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता से अपेक्षित प्रमाण पत्र दाखिल करने की बजाय याचिकाकर्ता (दोषी) ने उक्त प्रमाण पत्र दाखिल करने से छूट की अर्जी दाखिल की। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि यह एक जेल याचिका है, कोर्ट ने मामले को सर्वोच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति (एससीएलएससी) को भेज दिया। समिति ने अन्य बातों के साथ-साथ यह कहते हुए एक वरिष्ठ अधिवक्ता का पत्र अग्रसारित किया कि क्यूरेटिव याचिका दायर करने के लिए कोई आधार उपलब्ध नहीं है।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने याचिका खारिज करते हुए कहा,

"सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 का आदेश XLVIII नियम 2 (2) एक वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा यह प्रमाणित करते हुए प्रमाण पत्र दाखिल करना अनिवार्य बनाता है कि मामला 'रूपा अशोक हुर्रा' (सुप्रा) मामले में निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार कवर किया गया है। चूंकि वरिष्ठ अधिवक्ता से प्राप्त जानकारी में कहा गया है कि एक क्यूरेटिव पिटीशन पर विचार करने के लिए कोई आधार उपलब्ध नहीं है, इसलिए अपंजीकृत क्यूरेटिव पिटीशन सभी लंबित आवेदनों के साथ खारिज की जाती है।"

'रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा' मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में इस प्रकार कहा था: याचिकाकर्ता, क्यूरेटिव पिटीशन में, विशेष रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि उसमें उल्लिखित आधारों को पुनर्विचार याचिका में लिया गया था और इसे सर्कुलेशन द्वारा खारिज कर दिया गया था। क्यूरेटिव पिटीशन में उपरोक्त आवश्यकताओं की पूर्ति के संबंध में एक वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा प्रमाण पत्र शामिल होगा।

सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 का आदेश XLVIII इस प्रकार है:

I. क्यूरेटिव याचिकाएं न्यायालय के दिनांक 10 अप्रैल, 2002 के 'रूपा अशोक हुर्रे बनाम अशोक हुर्रे और अन्य' (1997 की रिट याचिका (सी) संख्या 509) के मामले में दिये गये निर्णय से शासित होंगी।

2. (1) याचिकाकर्ता, क्यूरेटिव पिटीशन में, विशेष रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि उसमें उल्लिखित आधारों को पुनर्विचार याचिका में लिया गया था और इसे सर्कुलेशन द्वारा खारिज कर दिया गया था। (2) एक क्यूरेटिव पिटीशन के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता का एक प्रमाण पत्र होगा कि याचिका उपरोक्त मामले में वर्णित आवश्यकताओं को पूरा करती है। (3) एक क्यूरेटिव पिटीशन के साथ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड का एक प्रमाण पत्र होगा कि यह आक्षेपित मामले में पहली उपचारात्मक याचिका है।

3. क्यूरेटिव पिटीशन पुनर्विचार याचिका में पारित निर्णय या आदेश की तारीख से उचित समय के भीतर दायर की जाएगी।

4. (I) क्यूरेटिव पिटीशन को पहले तीन सबसे वरिष्ठ जजों और उन जजों की उस बेंच (यदि उपलब्ध हो) को सर्कुलेट किया जाएगा, जिन्होंने मुकदमे का निपटारा किया था। (2) जब तक न्यायालय द्वारा कोई अन्य आदेश नहीं दिया जाता है, एक क्यूरेटिव पिटीशन बिना किसी मौखिक तर्क के सर्कुलेशन द्वारा निपटाई जाएगी, लेकिन याचिकाकर्ता अपनी याचिका को अतिरिक्त लिखित तर्कों द्वारा पूरक कर सकता है।

केस का नाम और साइटेशन : राजेश झा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार | एलएल 2021 एससी 587

मामला संख्या। और दिनांक: क्यूरेटिव पिटीशन (डायरी) 3106/2021 | 4 अक्टूबर 2021

कोरम: जस्टिस हिमा कोहली

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