राज्यसभा सांसद के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त, 6 साल में न पूछा कोई सवाल, केवल एक बहस में लिया हिस्सा

Praveen Mishra

16 March 2026 3:46 PM IST

  • राज्यसभा सांसद के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त, 6 साल में न पूछा कोई सवाल, केवल एक बहस में लिया हिस्सा

    भारत के पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई का राज्यसभा में नामित सदस्य के रूप में छह वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने गोगोई को विदाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता के रूप में गोगोई ने सदन की कार्यवाही में अपने गहरे कानूनी अनुभव और समझ से महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके संतुलित हस्तक्षेप तथा सलाह को सदन याद करेगा।

    गौरतलब है कि 16 मार्च 2020 को केंद्र सरकार ने रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया था। यह नियुक्ति उनके भारत के मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के चार महीने बाद हुई थी, जिस पर उस समय काफी विवाद हुआ था। कई आलोचकों ने इसे सरकार के पक्ष में दिए गए फैसलों के बदले “क्विड प्रो क्वो” के रूप में देखा था। हालांकि उस समय बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा था कि गोगोई न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक सेतु का काम करेंगे।

    हालांकि राज्यसभा में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी सक्रियता सीमित रही। पीआरएस (PRS) के आंकड़ों के अनुसार उनकी उपस्थिति लगभग 53 प्रतिशत रही। राज्यसभा की वेबसाइट के अनुसार छह वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने केवल एक बहस में भाग लिया, जो अगस्त 2023 में दिल्ली सेवा विधेयक (Delhi Services Bill) से संबंधित थी।

    उस बहस में बिल का समर्थन करते हुए गोगोई ने “बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत” की आलोचना की थी और कहा था कि इसकी न्यायशास्त्रीय आधारशिला विवादास्पद है। यह टिप्पणी उनके ही एक पुराने फैसले से अलग थी, जिसमें सीजेआई रहते हुए रोजर मैथ्यू मामले में उन्होंने बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत का समर्थन किया था और ट्रिब्यूनल रूल्स 2017 को न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने के आधार पर रद्द कर दिया था।

    अपने कार्यकाल के दौरान संसद में कृषि कानून, नए आपराधिक कानून, ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, वक्फ संशोधन अधिनियम और महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन गोगोई ने इन बहसों में भाग नहीं लिया।

    इसके अलावा, उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में एक भी प्रश्न नहीं पूछा और न ही कोई निजी सदस्य विधेयक (Private Member Bill) पेश किया।

    दिसंबर 2021 में एक साक्षात्कार के दौरान, जब पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने उनकी कम उपस्थिति को लेकर सवाल किया था, तो गोगोई ने कहा था कि यह मुख्य रूप से कोविड महामारी के कारण था और उस दौरान सदन की बैठने की व्यवस्था से वे सहज नहीं थे। उन्होंने कहा था, “मैं राज्यसभा तब जाता हूं जब मुझे लगता है कि वहां कोई महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर मुझे बोलना चाहिए। मैं अपनी इच्छा से आता-जाता हूं, किसी पार्टी के व्हिप से बंधा नहीं हूं।”

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