राम मंदिर चंदा चोरी: RJD सांसद ने अयोध्या ट्रस्ट के फाइनेंस के ऑडिट और CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

Shahadat

4 July 2026 9:42 AM IST

  • राम मंदिर चंदा चोरी: RJD सांसद ने अयोध्या ट्रस्ट के फाइनेंस के ऑडिट और CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

    बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फाइनेंस की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं के हालिया आरोपों, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की चल रही जांच और ₹77 लाख नकद के मामले का हवाला दिया।

    3 जुलाई को दायर जनहित याचिका (PIL) में कहा गया कि इसका मकसद धार्मिक रीति-रिवाजों या मंदिर की पूजा-पद्धति में कोई दखल देना नहीं है। बल्कि, इसका मकसद ट्रस्ट के सेक्युलर वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक दखल की मांग करना है।

    याचिका के अनुसार, मांगी गई राहतें केवल ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज के प्रबंधन तक सीमित हैं और इनका मकसद जनता से मिले चंदे की सुरक्षा करना और आरोपों की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है।

    मुख्य मांगों में याचिकाकर्ता ने चल रही जांच को राज्य पुलिस से हटाकर सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपने की मांग की।

    याचिका में जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सेक्युलर वित्तीय कामकाज की निगरानी के लिए रिटायर्ड न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों वाली एक अस्थायी, कोर्ट-निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी बनाने की भी मांग की गई।

    इसके अलावा, PIL में सभी वित्तीय रिकॉर्ड - जैसे फिजिकल डॉक्यूमेंट्स, डिजिटल लेजर, UPI ट्रांज़ैक्शन लॉग और बैंक स्टेटमेंट - को सुरक्षित रखने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया, ताकि सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सके।

    याचिकाकर्ता ने ट्रस्ट को प्रस्तावित ओवरसाइट कमेटी की पूर्व मंजूरी के बिना बड़े निवेश करने, बड़े कॉन्ट्रैक्ट करने या महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले लेने से रोकने का आदेश देने की भी मांग की।

    याचिका में एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा ट्रस्ट के सभी चंदे, लेन-देन और संपत्ति का व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई। इसमें यह भी अनुरोध किया गया कि ट्रस्ट को जनहित में पारदर्शिता के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय स्टेटमेंट और चंदे के रिकॉर्ड प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए।

    याचिका में अनुरोध किया गया कि जांच पूरी होने तक, ट्रस्ट के फंड के इस्तेमाल, बड़े कॉन्ट्रैक्ट देने, तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने, ट्रस्ट की संपत्ति बेचने, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताओं से जुड़े किसी भी बड़े वित्तीय या प्रशासनिक फैसले को प्रस्तावित कोर्ट-निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी की मंजूरी के बिना न लिया जाए। इसके अलावा, याचिका में मांग की गई कि ट्रस्ट के खातों, दान, चढ़ावे, बैंक ट्रांज़ैक्शन और वित्तीय रिकॉर्ड का एक भरोसेमंद और निष्पक्ष एजेंसी से व्यापक फ़ोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और ऑडिट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाए।

    PIL में कोर्ट से यह भी मांग की गई कि वह ट्रस्ट को निर्देश दे कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय स्टेटमेंट, मिले दान का विवरण, फ़ंड का इस्तेमाल और दूसरी वित्तीय जानकारी प्रकाशित करके पूरी पारदर्शिता बनाए रखे, साथ ही ज़रूरत पड़ने पर दान देने वालों की गोपनीय या संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखे।

    इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपने गठन के बाद से मिले सभी दान और योगदान का पूरा विवरण कोर्ट के सामने पेश करे। इसमें नकद दान, बैंक ट्रांसफ़र, डिजिटल पेमेंट, विदेशी योगदान, वस्तु के रूप में दान, सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान के साथ-साथ उनकी अकाउंटिंग, कस्टडी और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी शामिल हो।

    अंतरिम उपाय के तौर पर याचिका में कोर्ट की निगरानी वाली ओवरसाइट कमिटी बनाने और जांच पूरी होने या कोर्ट के अगले आदेश तक कमिटी की मंज़ूरी के बिना ट्रस्ट को बड़े वित्तीय, प्रशासनिक या नीतिगत फ़ैसले लेने से रोकने के लिए एकतरफ़ा अंतरिम आदेश की मांग की गई। इन फ़ैसलों में कॉन्ट्रैक्ट देना, निवेश करना, संपत्ति बेचना और अहम प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति करना शामिल है।

    इस हफ़्ते की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के लिए मिले दान के ग़लत इस्तेमाल की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करने वाली दो अन्य याचिकाओं को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट करने से इनकार कर दिया था।

    यह याचिका एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जसवंती ए. के ज़रिए दायर की गई।

    Case : Sudhakar Singh v. Union of India and others | Writ Petition (Criminal) Diary No. 39221/2026,

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