राज्य के बाहर रजिस्टर्ड पब्लिक ट्रस्ट को एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट के तहत छूट का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
7 Aug 2026 6:12 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के 2018 के नोटिफिकेशन को देखते हुए मध्य प्रदेश के बाहर रजिस्टर्ड पब्लिक ट्रस्ट एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट, 1961 के तहत छूट पाने के हकदार हैं। नतीजतन, ऐसे ट्रस्ट पर बेदखली की कार्यवाही के दौरान एक्ट के तहत किरायेदारों को मिलने वाली पाबंदियां और सुरक्षा लागू नहीं होती हैं।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने कहा,
"02.07.2018 के बाद वाले नोटिफिकेशन (जो 07.07.1989 के पहले वाले नोटिफिकेशन के क्रम में था) को देखते हुए हाईकोर्ट का यह आदेश कि 07.07.1989 का नोटिफिकेशन मध्य प्रदेश राज्य के बाहर रजिस्टर्ड ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे मुकदमों को रोकेगा, सही नहीं माना जा सकता।"
कोर्ट ने एमपी हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के बेदखली के मुकदमे को ऑर्डर VII रूल 11 CPC के तहत खारिज किया गया। यह मुकदमा प्रतिवादी-किरायेदारों के खिलाफ था और इसे इस आधार पर खारिज किया गया कि ट्रस्ट के पास बेदखली का मुकदमा दायर करने का अधिकार (locus) नहीं है, क्योंकि ट्रस्ट एमपी राज्य में कई संपत्तियां होने के बावजूद एमपी के बाहर रजिस्टर्ड है।
यह मामला सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट द्वारा अपने किरायेदार के खिलाफ बेदखली के मुकदमे और बकाया किराए के दावे से जुड़ा था। कार्यवाही के दौरान, प्रतिवादियों ने ऑर्डर VII रूल 11 CPC के तहत शिकायत (Plaint) को खारिज करने की मांग की। उनका तर्क था कि ट्रस्ट एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट की धारा 3(2) के तहत छूट पाने का हकदार नहीं है।
प्रतिवादियों के अनुसार, ट्रस्ट को पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर तो मान्यता मिली हुई, लेकिन वह एमपी पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1951 के तहत रजिस्टर्ड नहीं था। इसलिए वह 1989 के उस नोटिफिकेशन का फायदा नहीं उठा सकता, जिसमें कुछ पब्लिक ट्रस्ट को अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट के दायरे से छूट दी गई। ट्रायल कोर्ट ने 2012 में शिकायत (Plaint) को खारिज करने की अर्ज़ी को नामंज़ूर कर दिया। हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रिविज़न की कार्यवाही में किराएदार की दलील मान ली और 2017 में शिकायत को खारिज करने का आदेश दिया। इसके बाद ट्रस्ट ने 12 जुलाई 2018 की एक नई नोटिफ़िकेशन का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया; यह नोटिफ़िकेशन 1989 की नोटिफ़िकेशन के क्रम में जारी की गई।
2018 की नोटिफ़िकेशन में साफ़ तौर पर कहा गया कि मध्य प्रदेश में मौजूद ऐसी इमारतें (Accommodations), जो भारत के दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड पब्लिक ट्रस्ट की हों और जिनका इस्तेमाल शिक्षा, धर्म या चैरिटी के मक़सद से किया जाता हो, वे एमपी एकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट के नियमों से बाहर रहेंगी।
ट्रस्ट की अपील को मंज़ूरी देते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि 2018 की नोटिफ़िकेशन पहले की 1989 की नोटिफ़िकेशन के क्रम में जारी की गई, इसलिए अपील करने वाले (ट्रस्ट) को बेदखली का मुक़दमा दायर करते समय इसका फ़ायदा मिलेगा। असल में, ट्रस्ट का बेदखली का मुक़दमा फिर से शुरू हो गया।
कोर्ट ने कहा,
"सिर्फ़ इसी एक आधार पर विवादित आदेश रद्द किया जाना चाहिए और इसलिए इसे रद्द किया जाता है। साथ ही मामले को अधिकार-क्षेत्र वाली अदालत में वापस भेजा जाता है ताकि मामले के गुण-दोष और क़ानून के अनुसार इसका निपटारा किया जा सके।"
Cause Title: SCINDIA DEVESTHAN TRUST VERSUS JAMUNA PRASAD SARASWAT (DEAD) THROUGH LRS. & ORS.


