बिना विधायिका की सदस्यता के दीपक प्रकाश को बिहार का मंत्री बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Shahadat

6 Jun 2026 12:40 PM IST

  • बिना विधायिका की सदस्यता के दीपक प्रकाश को बिहार का मंत्री बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें दीपक प्रकाश को बिहार का पंचायती राज मंत्री दोबारा नियुक्त करने को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि प्रकाश राज्य विधायिका के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते। इसमें कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई व्यक्ति जो विधायक नहीं है, वह लगातार छह महीने तक मंत्री रह सकता है। इस दौरान उसे राज्य विधायिका की सदस्यता हासिल करनी होती है। यह छूट एक बार मिलने वाला मौका है और सरकार बदलने पर इसे दोबारा लागू नहीं किया जा सकता।

    याचिका के अनुसार, प्रकाश को 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्री बनाया था, जबकि वे विधानसभा के सदस्य नहीं थे। 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार की सरकार गिर गई, जिससे मंत्रिपरिषद भंग हो गई। 22 दिनों के अंतराल के बाद 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने प्रकाश को फिर से नियुक्त किया।

    20 नवंबर 2025 को हुई पहली नियुक्ति से दोबारा चुने जाने के लिए मिलने वाली 6 महीने की समय-सीमा 20 मई 2026 को समाप्त हो गई।

    याचिका में तर्क दिया गया कि यह पुनर्नियुक्ति संवैधानिक शक्ति का ऐसा इस्तेमाल है जिसका मकसद गैर-विधायकों को मिलने वाली छह महीने की संवैधानिक छूट की अवधि को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाना है।

    एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य (2001) मामले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता का कहना है:

    "याचिकाकर्ता का तर्क है कि अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाली छह महीने की छूट को उसी विधानसभा के कार्यकाल के दौरान न तो बढ़ाया जा सकता है और न ही दोबारा लागू किया जा सकता है; इसे इस्तीफे, कैबिनेट में फेरबदल, मुख्यमंत्री बदलने, मंत्रालय भंग होने या पुनर्नियुक्ति के जरिए रीसेट नहीं किया जा सकता।"

    याचिकाकर्ता का यह भी तर्क है कि बिना चुने गए व्यक्तियों को बार-बार मंत्री पद पर नियुक्त करने की अनुमति देने से संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधि सरकार, सामूहिक जिम्मेदारी और चुनावी जवाबदेही के सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा। 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग करते हुए याचिका में कोर्ट से कहा गया कि वह प्रकाश से उस संवैधानिक अधिकार के बारे में बताने को कहे, जिसके तहत वह मंत्री पद पर बने हुए हैं, और साथ ही उनकी दोबारा नियुक्ति को असंवैधानिक और अमान्य घोषित करे।

    याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 164(2), 164(4) और 141 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। साथ ही संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन के सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया।

    यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने दायर की।

    Case Details: Rakesh Kumar Singh v. State of Bihar & Ors., Writ Petition (Civil) No. 746 of 2026.

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