सुप्रीम कोर्ट में याचिका में CLAT 2026 में पेपर लीक का आरोप, जांच की मांग
Shahadat
6 Jan 2026 9:54 AM IST

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें 2026 कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के प्रश्न पत्र और आंसर-की के कथित लीक मामले में कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की गई। बता दें, परीक्षा 7 दिसंबर को हुई थी।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो दोबारा परीक्षा कराई जाए।
अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के CLAT उम्मीदवारों के एक समूह द्वारा दायर की गई इस याचिका में भेदभाव की आशंका जताई गई। यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्कुलेट हो रहे वीडियो, इमेज आदि के कारण दायर की गई, जो पहली नज़र में यह संकेत देते हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक हो गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक प्रतियोगी परीक्षा के लिए समान अवसर बहुत ज़रूरी है, लेकिन CLAT 2026 के मामले में ऑनलाइन सामग्री के सर्कुलेशन का पैमाना बताता है कि परीक्षा की पवित्रता को अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचा है।
याचिका में तात्कालिकता का हवाला दिया गया, जिसमें बताया गया कि पहली आवंटन सूची 7 जनवरी को प्रकाशित होने वाली है। यदि कथित पेपर लीक की स्वतंत्र जांच के बिना काउंसलिंग आयोजित की जाती है और सीटें आवंटित की जाती हैं तो योग्य स्टूडेंट्स को अपरिवर्तनीय परिणामों के साथ विस्थापित होना पड़ सकता है।
दावों के अनुसार, 6 दिसंबर को परीक्षा से लगभग 15 घंटे पहले तारीख और टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें ऑनलाइन सर्कुलेट होने लगीं, जिनमें उन स्टूडेंट्स के बयान थे, जो अवैध रूप से पेपर प्राप्त करने में सक्षम थे और एक ऐसे व्यक्ति के संदेश थे, जो कुछ भुगतान के बदले पेपर देने की पेशकश कर रहा था।
परीक्षा के बाद NLUs के कंसोर्टियम ने परीक्षा से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए एक शिकायत निवारण पोर्टल शुरू किया, जिसकी अध्यक्षता कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एमआर शाह कर रहे थे। हालांकि, कई स्टूडेंट्स ने पोर्टल के माध्यम से कथित लीक के बारे में चिंता जताई, लेकिन कोई जांच रिपोर्ट या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
समर्थन में याचिकाकर्ताओं ने तन्वी सरवाल बनाम CBSE और निधि कैम बनाम मध्य प्रदेश राज्य के फैसलों का हवाला दिया है। तन्वी सरवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6 लाख स्टूडेंट्स के लिए अखिल भारतीय प्री-मेडिकल 2015 को रद्द कर दिया, जब यह पाया गया कि 44 उम्मीदवार अनुचित साधनों के लाभार्थी थे और दोबारा परीक्षा का निर्देश दिया। यह कहा गया कि जहां पेपर लीक या गड़बड़ियों के कारण किसी परीक्षा की पवित्रता खतरे में पड़ जाती है, वहां पूरी प्रक्रिया खराब हो जाती है, क्योंकि मेरिट खत्म हो जाती है। संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समान अवसर की गारंटी खत्म हो जाती है।
यह याचिका AoR माविका कपिला के ज़रिए दायर की गई।
Case Title: LALIT PRATAP SINGH vs. CONSORTIUM OF NATIONAL LAW UNIVERSITIES, Diary No.407/2026

