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'महामारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को फिजिकल सुनवाई के लिए नहीं खोलने का कोई औचित्य नहीं: SCBA अध्यक्ष ने CJI को लिखा

LiveLaw News Network
3 March 2021 6:27 AM GMT
महामारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को फिजिकल सुनवाई के लिए नहीं खोलने का कोई औचित्य नहीं: SCBA अध्यक्ष ने CJI को लिखा
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखे एक पत्र में लिखा है कि कोरोनावायरस महामारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट को फिजिकल सुनवाई के लिए नहीं खोलने का कोई औचित्य नहीं है। अपने इस पत्र में SCBA अध्यक्ष CJI से सुप्रीम कोर्ट को मामलों की फिजिकल सुनवाई के लिए खोलने का आग्रह किया है।

मंगलवार को CJI को संबोधित एक पत्र में SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने लिखा,

"पूरी तरह से फिजिकल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को नहीं खोलने का कोई औचित्य नहीं है। जहां तक ​​सुरक्षा का सवाल है, यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि वकील अपने मास्क पहनना जारी रखेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करेंगे, ताकि वकीलों की सुरक्षा से कोई समझौता न किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश करने वाले वकीलों और वादकारियों के लिए प्रवेश बिंदु पर पर्याप्त थर्मल स्केनिंग बनाए जा सकते हैं और प्रत्येक कोर्ट रूम के बाहर हैंड सैनिटाइज़र लगाए जा सकते हैं। ये कदम सुप्रीम कोर्ट में फुल फिजिकल सुनवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं, जो संस्थान के कार्य करने का एकमात्र तरीका है।"

सिंह ने जोर देकर कहा कि महामारी के दौरान न्याय के पहिए को चालू रखने के लिए वर्चुअल सुनवाई केवल एक "स्टॉप-गैप" व्यवस्था थी और यह कि ओपन कोर्ट की सुनवाई एक सम्मेलन और संवैधानिक आवश्यकता दोनों है।

उन्होंने कहा कि वर्चुअल सुनवाई निम्न कारणों से फिजिकल सुनवाई के बराबर नहीं हो सकती है:

1. रजिस्ट्री को मूक और अनम्यूट करने का अधिकार पूरी तरह से फिजिकल सुनवाई की अवधारणा के विपरीत है। ऐसे उदाहरण हैं, जहां वकीलों को उनके मामलों में सुनवाई के बाद अनम्यूट नहीं किया गया।

2. आवाज और वीडियो प्रसारण की गुणवत्ता में भारी कमी है और जिसके परिणामस्वरूप वकील और बैंच के बीच पर्याप्त संचार नहीं हो पाता।

3. सुप्रीम कोर्ट में कभी यह मेंशन नहीं किया गया कि महामारी के दौरान वर्चुअल सुनवाई में तकनीकी खराबी आएगी।

4. बैंच के मामले की सुनवाई के दौरान सभी वकील अनम्यूट नहीं होते हैं और इसलिए कई बार जिन वकीलों का मामला अटका हुआ है उन्हें अपने प्रस्तुतिकरण करने में कठिनाई होती है।

5. यहां तक ​​कि दिल्ली हाईकोर्ट रजिस्ट्री के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे प्लेटफ़ॉर्म में रजिस्ट्री में वकीलों को म्यूट या अनम्यूट करने का अधिकार नहीं है और यह नियंत्रण मामलों में पेश होने वाले वकीलों के पास होता है।

सिंह ने कहा कि बार के जूनियर मेंबर मौजूदा वर्चुअल प्रणाली के चलते कमजोर लिस्टिंग के कारण बहुत परेशान हैं, इसलिए अब इस तथ्य को देखते हुए कि महामारी व्यावहारिक रूप से खत्म हो गई है, कम से कम दिल्ली में इसे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। वर्चुअल सिस्टम और फुल फिजिकल कोर्ट की सुनवाई बार के बड़े हित में है, इसलिए फिजिकल सुनवाई जल्द से जल्द शुरू होनी चाहिए।

संबंधित समाचार में, दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 मार्च से मामलों की फुल फिजिकल सुनवाई शुरू करने का फैसला किया है।

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