'न्यूज़रूम बंद हो जाएंगे': पारंपरिक मीडिया के डिजिटल विंग्स ने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
Shahadat
27 Oct 2026 12:33 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन' (DNPA) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023' (DPDP Act) के प्रावधानों को चुनौती दी गई।
DNPA एक ऐसा संगठन है, जिसमें 'द इंडियन एक्सप्रेस', 'द हिंदू', 'इंडिया टुडे', 'टाइम्स ग्रुप', 'ज़ी', 'NDTV', 'नेटवर्क 18' जैसे 21 बड़े समाचार संगठनों के डिजिटल विंग शामिल हैं। संगठन का तर्क है कि इस कानून के प्रावधान प्रेस की आज़ादी पर बुरा असर डालते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में DPDP Act की धाराओं 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई। साथ ही, इसमें DPDP रूल्स, 2025 के नियमों 16, 17 और 23 को भी चुनौती दी गई। नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र खोजी पत्रकार युक्ता मुद्गल भी इस याचिका में एक याचिकाकर्ता हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील माधवी दीवान ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष कहा, "ये प्रावधान न्यूज़रूम को बंद कर देंगे।"
दीवान ने आगे कहा,
"यह 'पारंपरिक मीडिया' (legacy media) की ओर से दायर पहली व्यापक याचिका है। हम पारंपरिक मीडिया हैं। यह न्यूज़ की पूरी अवधारणा को ही बदल देगा। अगर मुझे इस बात के लिए 'डेटा प्रिंसिपल' (जिसका डेटा है) की मर्ज़ी पर निर्भर रहना पड़े कि वह सहमति देगा या नहीं तो न्यूज़ का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो जाएगा... न्यूज़ का नया होना ज़रूरी है। यह न्यूज़रूम को बंद कर देगा। अगर मुझे हर बार अनुमति और सहमति मांगनी पड़े, तो फिर न्यूज़ का क्या मतलब रह जाएगा?"
CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार को सुरक्षा उपायों (Safeguards) के बारे में सुझाव दे सकते हैं।
उन्होंने कहा,
"आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। आप केंद्र सरकार और हमें यह बताने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं कि आप डेटा के दुरुपयोग को कैसे रोकेंगे।"
सीनियर वकील ने जवाब दिया कि याचिका दायर करने के बाद संगठन ने केंद्र सरकार को एक प्रतिवेदन (Representation) सौंपा है। याचिका में कहा गया कि DNPA ने 10 अगस्त 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा था, जिसमें DPDP Act और नियमों के लागू होने को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। इसके बाद, 25 अगस्त 2026 को DNPA के प्रतिनिधियों और मंत्रालय के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई।
CJI ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों और मीडिया के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
दिवान ने अपनी दलील में कहा,
"जब आप इस अधिनियम को देखेंगे, तो पाएंगे कि यह पत्रकारिता के लिए बिल्कुल भी नहीं था। इसके पिछले संस्करणों में हमें बाहर रखा गया था, पता नहीं इस बार ऐसा क्यों हुआ। यह हमारे लिए नहीं है। अगर हमें हर चीज के लिए अनुमति लेनी पड़ी तो न्यूज़रूम बंद हो जाएंगे। इससे 'प्री-सेंसरशिप' (प्रकाशन-पूर्व सेंसरशिप) की व्यवस्था लागू हो जाएगी। हमें किसी पर रिपोर्ट करने के लिए उसी से अनुमति लेनी पड़े! ऐसा कैसे हो सकता है? फिर खबर क्या रह जाएगी? अगर कुछ गलत होता है, तो हम उसके परिणाम भुगतने को तैयार हैं, लेकिन प्रकाशन से पहले ही किसी सामग्री को रोका नहीं जा सकता। वैसे भी, हम पहले से ही नियमों के दायरे में हैं।"
पीठ ने याचिका और 'स्टे' (रोक) लगाने की अर्जी पर नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 17 नवंबर तक देना होगा। दिवान ने पीठ को बताया कि RTI Act में संशोधन को चुनौती देने वाली कुछ अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं, लेकिन पत्रकारिता पर पड़ने वाले असर के आधार पर यह पहली व्यापक चुनौती है।
Case Title : DIGITAL NEWS PUBLISHERS ASSOCIATION AND ANR v. UNION OF INDIA

