NEET UG 2026 Cancellation : यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने NTA को भंग करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

Shahadat

16 May 2026 4:13 PM IST

  • NEET UG 2026 Cancellation : यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने NTA को भंग करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

    यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की, जिसमें NEET-UG 2026 परीक्षा आयोजित करने में "प्रणालीगत विफलता" (systemic failure) के चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग की गई।

    एडवोकेट रितु रेनीवाल के माध्यम से दायर इस याचिका में संसद द्वारा पारित कानून के ज़रिए एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षण निकाय (statutory national testing body) के गठन की मांग की गई। इस निकाय के पास परिभाषित कानूनी अधिकार, पारदर्शिता के मानक और विधायिका के प्रति सीधी जवाबदेही होनी चाहिए।

    याचिका में कहा गया,

    "याचिका का मुख्य बिंदु यह है कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में NTA की वर्तमान कानूनी स्थिति, एक 'जवाबदेही का शून्य' (accountability vacuum) पैदा करती है।"

    अप्रत्यक्ष जवाबदेही: UPSC (संवैधानिक) या SSC (वैधानिक) के विपरीत, NTA सीधे तौर पर संसद के प्रति जवाबदेह नहीं है।

    सीमित जांच: यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है, जिससे यह CAG के सीधे ऑडिट और संसदीय समितियों की अनिवार्य जांच से बचा रहता है।"

    याचिका में आगे कहा गया,

    "संसद के एक अधिनियम द्वारा गठित निकाय का होना इसलिए आवश्यक है, ताकि संसदीय समितियों के प्रति सीधी जवाबदेही, CAG का अनिवार्य ऑडिट और पेपर लीक होने पर वैधानिक दंड (प्रशासनिक कार्रवाई से परे) सुनिश्चित किया जा सके।"

    याचिकाकर्ता ने एक ऐसी समिति के गठन की भी मांग की, जिसकी निगरानी अदालत करे। यह समिति आगामी राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन की देखरेख करेगी, ताकि "शून्य-लीक" (zero-leak) वाली निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

    यह याचिका NTA द्वारा 3 मई, 2026 को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद दायर की गई। NTA ने पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द की थी और मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया था। इस सप्ताह की शुरुआत में एक और याचिका दायर की गई, जिसमें NTA को बदलने या उसका मौलिक पुनर्गठन करने और न्यायिक निगरानी में NEET-UG 2026 की परीक्षा दोबारा आयोजित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

    UDF की याचिका में कहा गया कि NEET परीक्षाओं की शुचिता में बार-बार होने वाली सेंध (Compromise), संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है और 22.7 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है।

    याचिका में कहा गया,

    "NEET-UG भारत में ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन का एकमात्र माध्यम है, जो सीधे तौर पर 22.7 लाख से अधिक छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य को निर्धारित करता है। इस परीक्षा की शुचिता में बार-बार होने वाली सेंध, अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और जीवन/आजीविका के अधिकार की मौलिक गारंटियों पर सीधा हमला है।"

    याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि NTA द्वारा सुरक्षा उपायों के बारे में दिए गए आश्वासनों के बावजूद, NEET UG 2026 परीक्षा की शुचिता भंग हुई।

    आगे कहा गया,

    "याचिकाकर्ता 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा की भयानक विफलता को उजागर करता है। हाई-टेक सुरक्षा उपायों (GPS ट्रैकिंग, AI-सहायता प्राप्त CCTV, और बायोमेट्रिक सत्यापन) के दावों के बावजूद, परीक्षा एक संगठित 'Guess Paper' रैकेट द्वारा प्रभावित हुई। राजस्थान SOG की जांच और उसके बाद CBI की FIRs ने इस बात की पुष्टि की कि परीक्षा सामग्री, परीक्षा की तारीख से काफी पहले ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से प्रसारित कर दी गई थी। इस प्रणालीगत चूक के कारण परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने का अभूतपूर्व कदम उठाना पड़ा, जिससे 22.7 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया।"

    याचिका में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि NTA, राष्ट्रीय परीक्षाओं से संबंधित संप्रभु कार्यों का निर्वहन करते रहने के बावजूद, प्रत्यक्ष संसदीय जाँच और अनिवार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ऑडिट के दायरे से बाहर बना हुआ है।

    याचिका में NEET-UG 2024 से संबंधित 'वंशिका यादव बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया, जहां न्यायालय ने NTA को "बार-बार अपनी बात से पलटने" (flip-flops) और प्रशासनिक चूकों के प्रति आगाह किया था।

    यह निजी वेंडरों पर निर्भरता कम करने और कंप्यूटर-आधारित या हाइब्रिड परीक्षा मॉडलों की ओर बढ़ने के लिए के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर भी आधारित है।

    याचिका में आगे कहा गया,

    "वर्तमान मॉडल परीक्षा के मुख्य कार्यों को निजी वेंडरों को आउटसोर्स करने की अनुमति देता है, वह भी बिना किसी कठोर वैधानिक सुरक्षा उपाय के; जिसके परिणामस्वरूप छात्रों की कीमत पर 'विफलताओं का व्यावसायीकरण' होता है।"

    याचिका में यह तर्क दिया गया कि 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' के लागू होने के बावजूद, सरकार संगठित नकल नेटवर्क और पेपर लीक को रोकने में विफल रही है।

    याचिका में कहा गया कि बार-बार होने वाले परीक्षा लीक के कारण छात्रों और उनके परिवारों में मनोवैज्ञानिक तनाव, आर्थिक कठिनाई और अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसमें परीक्षा-संबंधी तनाव से कथित तौर पर जुड़े छात्रों की आत्महत्याओं की घटनाओं को भी उजागर किया गया।

    अन्य राहतों के अलावा, याचिका में NTA को उसके वर्तमान स्वरूप में भंग करने, परिभाषित पारदर्शिता और जवाबदेही मानदंडों के साथ एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षण प्राधिकरण स्थापित करने हेतु कानून बनाने और भविष्य की राष्ट्रीय परीक्षाओं की निगरानी के लिए न्यायालय द्वारा निगरानी वाली एक समिति नियुक्त करने के निर्देश देने की मांग की गई।

    Case Title – United Doctors Front [UDF] Regd. v. Union of India and Ors.

    Next Story